दुख तथा क्लेश
उनके रोज के इस नियम का कोई प्रतिकूल असर हमें
शुरूआत में देखने को नहीं मिला, परंतु कुछ समय के बाद उस मूर्ती के
अंदर जो आत्मिक शक्ति थी वह पिताजी पर हावी होने लगी। फिर वह दुष्ट
आत्मा पिताजी पर समय असमय सवार होने लगी।
पहले मेरे पिताजी
में कोई भी बुरी आदत नहीं थी, लेकिन समय के बीतने के साथ तमाम तरह
की बुरी आदतें उन्हें घेरने लगी। बीड़ी पीना, तंबाकू खाना, गुटखा
खाना इस प्रकार की बुरी आदतें उन्हें लग गई। इसके बाद उन्होने शराब
पीना शुरू कर दिया, वह एक बार में 4-5 बोतल शराब पी जाते थे और
उन्हें नशा भी नहीं होता था। घर में रोज लड़ाई झगड़ा होने लगा, और
धीरे धीरे यह आम बात बन गई और हम सब बहुत परेशान हो गये।
लगभग 2 साल तक
ऐसा ही चलता रहा। शैतान भी उन पर और भी ज़ोर से हावी होने लग गया।
यह दुष्ट आत्मा उन्हें कभी जंगल में ले जाता तो कभी श्मसान घाट पर।
रात में वो घर में सोते तो थे पर सुबह वहाँ मिलते नहीं थे। वो कभी
कहीं मिलते तो कभी कहीं, और सुबह स्वयं उन्हें भी याद नहीं होता था
कि वह वहाँ कैसे पहुँचे। ऐसी मुसीबत में सबने हमसे पल्ला झाड़ लिया
और हम अपने आप को असहाय महसूस करते थे।
हमें खाने के भी
लाले पड़ने लगे क्योंकि पिताजी ही एकमात्र कमाने वाले थे। यूँ तो
माताजी भी एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) में
काम करती थी, परंतु उन्हें वहाँ बहुत ही मामूली वेतन मिलता था। एक
तरफ पिताजी की ऐसी हालत और दूसरी ओर हमारा घर का खर्च बड़ी मुश्किल
से चलता था, इसलिये हमारी परिस्थियाँ बद से बदतर होती चली गई। हम
पिताजी को ठीक कराने के लिये जगह जगह लेकर जाते पर कोई फायदा नहीं
होता था। कोई भी कहीं का पता बताता तो तुरंत हम उन्हें वहाँ लेकर
जाते, इस आशा के साथ की पिताजी की हालत में कुछ सुधार हो, पर ऐसा
नहीं हुआ। दिल्ली में ऐसा कोई तांत्रिक या मुल्ला-मौलवी नहीं बचा
जहाँ हमने पिताजी को दिखाया न हो, पर कोई फायदा नहीं हुआ। हर दर से
हमें निराशा ही हाँसिल हुई। किसी ने हमें बताया कि मेहंदीपुर
बालाजी लेकर जाओ तो हम उनको 3 बार वहाँ भी लेकर गये पर यहाँ भी
हमें निराशा ही हाथ लगी।
हम ईश्वर में
बहुत ही आस्था रखने वाले लोग थे। हमारे अपने घर में एक बहुत बड़ा
मंदिर बना हुआ था। जिसमें हमनें चांदी की मुर्तियाँ स्थापित की गई
थी। सभी व्रत रखना, रोज सुबह उठकर नहाने और पूजा करने के बाद ही
हमारा दिन शुरू होता था। इतने ईश्वर-भक्त होते हुए भी हमारी
परेशानी ज़रा भी कम नहीं हुई, और इसी परेशानी को सहते हुए हमें 4
साल बीत गये।
नई शुरूआत
माताजी जिस स्वयंसेवी संस्खा में नौकरी करती थी वह
एक मसीही संस्था थी, इसलिये वहाँ प्रभु यीशु की भक्ति तथा
प्रार्थना होती थी। उनके साथ काम करने वाली कुछ महिलाओं में से कुछ
ने हमारी परिस्थितियों को जानकर उन्हें प्रभु यीशु मसीह से
प्रार्थना करने का सुझाव दिया। उन्होंने उन्हें माताजी को बाइबल का
नया नियम देते हुए कहा की आप अपने पति के लिये प्रार्थना करें।
मम्मी ने घर आकर पिताजी को यह बात
बताई तो पिताजी बहुत गुस्सा हुए और गाली देते हुए
बोले कि तू मुझे ईसाई बनाना चाहती है, फैंक दे इस किताब को। यह
सुनकर माताजी ने उस किताब को अलमारी में रख दिया।
शैतान अब पिताजी को बहुत परेशान करने लगा; वो उन पर अत्यंत उग्र
रूप से हावी हो गया। वह पिताजी को उकसाता और वह दीवार को गिराने
लगते। 4-5 लोगों के संभाले भी वो नहीं संभलते बल्कि उन पर भारी
पड़ते। यहाँ तक कि शैतानी ताकत के चलते वह उन लोगों को भी उठा
उठाकर फैंक देते। दुष्ट आत्मा उनसे बातें भी करने लगा। अब यह
प्रक्रम भी अगले एक साल तक चलता रहा और हमनें इन सब मुसीबतों को
झेला जो शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
एक दिन दुष्ट आत्मा उनसे बोला कि आज रात 12 बजे मैं तुझे लेकर
जाऊँगा और तुझे मार डालूँगा क्योंकि तू मुझे बहुत पसंद है। उस
दैवीय शक्ति ने पिताजी को यहाँ तक धमकी दे डाली कि तुझे जिसको
बुलाना हो उसे बुला ले क्योंकि तुझे कोई नहीं बचा सकता। पिताजी ने
हमें यह बताया और हम एक दम परेशान हो गये। हमें कुछ समझ नहीं आया
कि क्या करें और क्या नहीं क्योंकि हमारा साथ देने वाला कोई नहीं
था। हम अकेले पड़ गये थे, सिर्फ पिताजी के एक दोस्त थे जिनका नाम
पेट्रिक था, वो हमेशा हमारे साथ थे।
उस दिन पिताजी की
बात सुनकर इतना घबरा गये थे कि हमें कुछ सूझा ही नहीं और दिन भर
अपने घर में बने मंदिर के सामने बैठ कर पूजा अर्चना करते रहे। धीरे
धीरे रात हो गई पर कुछ भी नहीं हुआ। शैतान जैसे पिताजी के सामने
आकर बैठ गया और कहने लगा कि थोड़ा समय और बचा है 12 बजने में। जो
कोशिश करनी है वो कर ले लेकिन कोई भी देवी-देवता तुझे मुझसे बचाने
के लिये नहीं आयेगा।
छुटकारे का दिन
रात को 11:55 हो गये और पिताजी रोने लगे। वो अपने आप को बचा लेने
की गुहार लगाने लगे। उन्होंने मंदिर का पर्दा बंद कर दिया और
प्रार्थना करने लगे की - हे ईश्वर, मैं जानता हूँ कि आप एक ही है
जो इस दुनिया को चलाते हैं; मैं इस शैतान से हारना नहीं चाहता, तू
मेरी सहायता कर। फिर उन्होंने आँखें खोली और माताजी से कहा कि वो
किताब (बाइबल का नया नियम) लाकर मुझे दे, शायद उस से मैं बच जाऊँ।
माताजी ने नया नियम तुरंत उनको लाकर दिया और पिताजी ने जैसे ही उस
किताब को छूआ तो जैसे उनको बिजली का झटका सा लगा।
फिर उन्होंने उस किताब को अपने शरीर के अलग अलग हिस्सों पर लगाना
शुरू कर दिया और हर स्पर्श पर उनको झटका सा लगता रहा। फिर पिताजी
ने नये नियम की उस किताब को पढ़ना शुरू किया। बाइबल का हर वचन
शैतान के विरुद्ध निकलता गया और वो पढ़ते चले गये और पढ़ते पढ़ते
ही सो गये। सुबह उठकर पिताजी ने कहा कि मुझे पिछले 5 साल में ऐसी
अच्छी नींद नहीं आई। पाँच साल में पहली बार ऐसी नींद आई जैसे मैं
अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सो रहा हूँ। हम इस बात से खुश थे कि
शैतान उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाया और पिताजी ठीक होने लगे। हम प्रभु
मसीह के प्रेम तथा सामर्थ को समझने के लिये कलीसिया (सृष्टिकर्ता
ईश्वर का आराधना घर अथवा सत्संग घर - अंग्रेजी में चर्च) जाने लगे।
एक दिन हम एक कलीसिया में गये, वहाँ पर शैतान फिर पिताजी पर हावी
हो गया। लगभग 20 अगुवा तथा पास्टर उनको पकड़कर प्रार्थना करने लगे।
शैतान पिताजी पर इतना उग्र रूप से आया था कि उसने सबको फेंक दिया
और सभी दूर जाकर गिरे। फिर हमें किसी ने बताया की ग्रीन पार्क की
एक कलीसिया में पिताजी को ले जायें। हम पिताजी को उस कलीसिया में
लेकर गये। शैतान वहाँ पर भी पिताजी पर हावी हो गया पर पास्टर पिताजी
के लिये प्रार्थना करने लगे। शैतान इस बात को प्रकट रूप में बोलते
हुए निकल गया कि यीशु नाम को छोड़ किसी भी और धर्म में और ऐसी कोई
शक्ति नहीं थी जो मेरे पिताजी को छुड़ा सकती थी।
इस प्रकार परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमारे जीवन में
प्रवेश किया। हमनें उसके सामर्थ्य को देखा तथा उसके महान प्रेम के
विषय में जाना तथा अनुभव किया और अपने ह्रदय के द्वार को खोला।
परमेश्वर ने हमारे दिल में प्रवेश किया और हमारा जीवन सदा के लिये
बदल गया। तब से लेकर आज तक हम प्रभु यीशु में शांति के साथ अपना
जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हमारे जीवन में प्रभु ने एक बड़ा काम किया
है इसलिये हम दूसरों को इस सच्चे परमेश्वर के बारे में बताते हैं
ताकि हमारे संपर्क में आने वाले लोग भी शैतान के चंगुल से निकल सकें।
मनोज कुमार
ईमेल-manojneera@yahoo.in
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आत्मिक संदेश oooooo
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मनोज भाई की जीवन साक्षी उनका व्यक्तिगत अनुभव है
तथा उनके ई-मेल के आधार पर ऊपर वर्णित है।
यीशु मसीह परम सत्य हैं। उद्धार (मुक्ति) तथा
पापक्षमा हमें केवल यीशु मसीह के द्वारा ही मिल सकती है।
मोक्ष-मार्ग दिखाने वाले और सच्ची शांति देने वाले प्रभु यीशु पर
आप भी विश्वास कर सकते हैं (भले ही आप किसी भी धर्म अथवा पंथ के
मानने वाले क्यों न हों, और आपकी परिस्थिति कैसी भी विकट क्यों न
हों)। अगर आपको
उपरोक्त जीवन-साक्षी से बल मिला है तो आप
उनसे या हमसे
संपर्क कर सकते हैं। आपके विश्वास के अनुसार प्रभु आपको भी आशीष
दें।
यदि आप अभी से विश्वास कर प्रभु को अपना जीवनदाता, मुक्तिदाता
स्वीकार करना चाहते हैं तो ये प्रार्थना सच्चे मन से करें –
“प्रभु यीशु, मैंने आज जाना है कि आप जीवित ईश्वर हैं, जो
छुटकारा देते हैं, पाप-क्षमा
करते हैं, सच्ची शांति देते हैं और सदैव अपने भक्तों के संग रहते
हैं। मैं अपने पापों से पश्चाताप करता हूँ और आपसे प्रार्थना करता
हूं, कि मेरे पाप क्षमा कर मेरे मुक्तिदाता बन जाइये। अपनी शांति
और अपना जीवन आप मुझे भी प्रदान करें। मैं आज से आपको अपना
उद्धारकर्ता मानता हूँ और अपना सर्वस्व आपके लिये समर्पित करता
हूँ। मेरी सहायता करें ताकि आगे का सारा
जीवन आपके वचनों के अनुसार बिता सकूँ। मेरी प्रार्थना को सुनने के
लिये आपका धन्यवाद। प्रभु यीशु के नाम से मांगता/मांगती हूँ।”
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