बेटी को ब्लड कैंसर से चंगाई

प्रभु यीशु के मधुर नाम में आपको अभिनंदन!

मेरा नाम इंदर मूलचंदानी है। मैं एक हिंदु परिवार में पैदा हुआ हूँ। आज मैं आपको अपने जीवन की वह सत्य घटना बताना चाहता हूँ जिसने मेरे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। मैं आज प्रभु यीशु का विश्वासी हूँ परंतु मैंने धर्म-परिवर्तन नहीं किया, मैंने अधर्म का मार्ग छोड़कर जीवित ईश्वर के साथ एक रिश्ता बना लिया है। मेरी गवाही कुछ इस प्रकार है:

सन 1996 में मैं अपने काम के सिलसिले में एक कंपनी में गया जहाँ में अंजली नाम की एक कैथोलिक युवती से मिला जो कि उसी कम्पनी में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। कई बार वहाँ आने जाने से हम दोनों में मित्रता हो गई और यह दोस्ती धीरे धीरे प्रेम में परिवर्तित हो गई। अन्ततः 1998 में हम दोनों की शादी हुई। इसके बाद 2001 में हमारी एक प्यारी सी बेटी हुई जिसका नाम हमने जानवी रखा। जन्म के दस महिने के बाद जानवी की आँखों में सूजन आई और वो इतनी बढ़ गई कि ऐसा लगता था जैसे वो आँखें निकल कर गिर पड़ेंगी। हम तुरंत उसे अस्पताल लेकर गये। शारजाह के एक बड़े अस्पताल में उसका इलाज शुरू हुआ और काफी सारे टेस्ट के बाद डाक्टर नें हमको जो बताया उससे हमपर बिजली सी गिर पड़ी।

डॉक्टर ने बताया कि जानवी को ब्लड कैंसर है।

हमने डॉक्टर से बहुत सवाल-जवाब किये कि इतनी छोटी उम्र में उसे ऐसा कैसे हो सकता है, वगैरह वगैरह। परंतु डॉक्टर ने कहा कि यह एक बीमारी है जो कि किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वो अपनी तरफ से भरसक प्रयास करेंगे कि बच्ची को बचा लें परंतु उन्होंने यही कहा कि आप ईश्वर से प्रार्थना करें क्योंकि हम अभी कुछ बता नहीं सकते कि क्या होगा। हमें समझ नहीं आ रहा था कि हम क्या करें।

यूँ तो मैं काफी हल्की फुल्की सी ज़िंदगी जी रहा था परंतु इस बात ने जैसे मुझे झकझौर कर रख दिया। मैं पहले भी शराब पीता था, क्लब में जाता था परंतु इस खबर के बाद मैं काफी पीने लगा, और लगातार सिगरेट पीता रहता था। मैं अपनी बेचैनी को इन चीजों से खत्म करने की कोशिश करता था और अपने आप को अन्य बातों में व्यस्त रखने के लिये क्लब वगैरह भी जाता था परंतु मुझे शांति नहीं मिलती थी। हमारी बेटी को डॉक्टरों ने अल-ऐन के अस्पताल में भेज दिया जहाँ कैंसर का इलाज होता था। मैं और मेरी पत्नि बहुत कठिन समय से गुज़र रहे थे और अपनी तरफ से हर तरह के धार्मिक काम करने की कोशिश करते थे। मैंने मंदिर जाना शुरू कर दिया ताकि मेरे धार्मिक कामों से मेरी बेटी के लिये ईश्वर से कोई चमत्कार पा सकूँ। परंतु जानवी की हालत और खराब होती चली गई। हमारी शांति चली गई।

हमारा विश्वास टूट चला था और जब हम निराशा में थे तब अल-ऐन के उसी अस्पताल में एक बहन हमारे पास आई और उन्होंने बताया कि यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना से रोगी चंगे हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि यीशु मसीह हमसे प्यार करता है और हम किसी भी जाति, देश या भाषा के लोग क्यों न हों, वो हम सबको पापों से छुड़ाना चाहता है ताकि हम नर्क की आग से बच जायें। उनकी बातों से हमें अच्छा तो लगा परंतु हम तुरंत ही विश्वास करने की हालत में नहीं थे। तौभी मैंने कहा कि हमने सब धर्मों के काम करके देख लिया है, कुछ नहीं हुआ, चलों हम यीशु मसीह के धर्म में भी चल कर देख लेते हैं।

परंतु हमने बाद में सीखा कि यीशु मसीह कोई धर्म चलाने नहीं आये थे और इसीलिये मसीहीयत कोई धर्म नहीं है बल्कि परमेश्वर के साथ संबंध बनाकर उसमें जीवन बिताने का तरीका है। अब मैं जानता हूँ कि यीशु मसीह हमारे ईश्वर के साथ टूटे हुए संबंध को जोड़ने के लिये इस दुनिया में आये थे और हमारे पापों को मिटाकर हमें माफ कराने के लिये उन्होंने क्रूस की मृत्यु तक भी उन्होंने सह ली। आज वो जिन्दा है क्योंकि वो तीसरे दिन जी उठे औऱ आज भी जीवित हैं और हमारी प्रार्थनाओं को सुनते हैं।

हमनें प्रार्थना के लिये अपनी स्वीकृति दे दी और तुरंत ही उस बहन नें पास्टर तथा अन्य कुछ भाई-बहनों को प्रार्थना के लिये आने के लिये कहा। उन्होंने हमें बताया कि ईसा-मसीह के नाम से प्रचलित नाम सच्चे ईश्वर का नाम है जो पूरी मानव जाति से प्रेम करता है और उन्हें पाप तथा आत्मिक-मृत्यु से बचाकर हमें स्वर्ग में शाश्वत जीवन देना चाहता है। उन सभी ने मिलकर हमारी बेटी जानवी के लिये प्रार्थना की। वे लोग रो-रोकर उसके लिये प्रार्थना कर रहे थे (जोकि मेरी समझ से बाहर था कि कैसे वो मेरी बेटी से इतना प्यार करने लगे कि उसके लिये रो भी रहे थे)। उनकी इस प्रार्थना का हम पर बहुत प्रभाव हुआ और हमें शांति मिली।

मेरी पत्नि अंजली कैथोलिक परिवार से होते हुए भी मुझे प्रभु यीशु मसीह के बारे में कभी ज्यादा कुछ नहीं बता पाई थी। परंतु इस प्रार्थना के बाद चर्च के लोगों ने हमें वर्ड इंटरनेश्नल चर्च में आने के लिये न्योता दिया। हम चर्च जाने लगे और धीरे धीरे जानवी के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। मुझे प्रभु यीशु के निःस्वार्थ प्रेम ने अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया और मैं भी अपने जीवन में एक परिवर्तन का अनुभव करने लगा। मैं समझ गया कि यीशु मसीह पवित्र परमेश्वर के पुत्र होते हुए भी मेरे पापों के कारण मारे गये और इस प्रकार उन्होंने मेरे पापों की कीमत चुका दी। यह सब जानने के बावजूद भी मैं अपनी शराब तथा सिगरेट जैसी पुरानी आदतों को छोड़ने के लिये तैयार नहीं था।

सन 2003 में, एक प्रार्थना सभा के दौरान मैंने नरेंद्र भाटिया जी की गवाही सुनी। मैंने देखा कि एक समय वह भी अपनी मर्जी से जीवन बिता रहे थे परंतु एक दिन उन्होंने सब बुरी चीजों को यीशु मसीह के प्रेम के कारण त्यागने का निर्णय लिया और इससे उन्हें बहुत आशीष मिली और परमेश्वर ने उन्हें पास्टर का दर्जा दिलाकर अपनी सेवा के लिये इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। मैंने बाइबल से यह बात पहले ही सीख ली थी कि बिना नया जन्म लिये (अर्थात बिना पाप-क्षमा तथा यीशु मसीह को अपना गुरू तथा मुक्ति दाता स्वीकार करना) कोई स्वर्ग राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता, इसलिये उस दिन मीटिंग से बाहर आकर सबसे पहले मैंने अपनी कार में रखी बोतलों को तुरंत फैंक दिया और अपना जीवन प्रभु यीशु के हाथों में सौंप दिया।

प्रिय मित्र, उसी दिन से मेरा जीवन बदल गया। मेरी सारी बुरी आदतें खत्म हो गई और मैं आज़ाद हो गया। मेरे सारे पाप क्षमा हो गये और मैं अपने दिल की गहराई से परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ कि उसने मुझे और मेरे परिवार को चुन लिया। मैं और मेरी पत्नि अब व्यक्तिगत तौर पर ईश्वर को जानते हैं। मेरी बेटी जानवी भी ठीक होती चली गई और अब वो 8 साल की है और बीमारी के सारे लक्षण भी प्रभु यीशु के नाम से खत्म हो गये हैं और वो अब पूरी तरह से स्वस्थ है। न सिर्फ परमेश्वर ने हमारी बेटी को ठीक किया है बल्कि हमें भी पापों से मुक्ति दिला दी है।

तब से लेकर अब तक ईश्वर अपने बलवंत हाथों में हमे संभाले हुए है और हमें विश्वास में बढ़ा रहा है और हर तरीके से परमेश्वर ने हमें आशीषें दी हैं। आज हम उस जीवित ईश्वर की दया कि जीती जागती गवाहियाँ हैं।

यदि आप इस जीवन साक्षी को पढ़कर आशीषित और धन्य महसूस करते हैं तो आप हमें लिख सकते हैं। यदि आप ऐसी किसी परेशानी से होकर गुज़र रहे हैं तो आज ही प्रभु यीशु पर विश्वास करें और इस प्रकार प्रार्थना करें -

"प्रिय प्रभु यीशु, आज मैंने जाना है कि आप जीवित, प्रेम करने वाले और आश्चर्यकर्म करने वाले, प्रार्थना सुनने वाले महाना ईश्वर हैं। प्रभु मैं भी गंभीर समस्या में हूँ, परंतु मैं विश्वास करता हूँ कि आप मुझे छुड़ सकते हैं। मैं आप पर विश्वास करता हूँ और आपके पीछे चलना चाहता हूँ। मेरी सहायता करें। मेरी प्रार्थना सुनने के लिये धन्यवाद। प्रभु यीशु के नाम से माँगती/माँगता हूँ।"


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 "Anyone who believes in the Son of God has this testimony in his heart..."

[1 John 5:10]