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Last Updated: June, 2009    

परिवार जिसने चंगाई का बड़ा आश्चर्यकर्म देखा

 
हमारे प्रभु यीशु की स्तुति हो।

मुझे खुशी है कि आप इस गवाही को पढ़ रहे हैं। परमेश्वर आपके इसे पढ़ने पर आपको आशीष दें। जब आप इसे पढ़ रहें हैं, तब भी मेरी प्रार्थना है कि ईश्वर आपके आनंद और विश्वास को और बढ़ाये। मैं आपको ईश्वर के द्वारा मेरे परिवार में किये गये महान कामों के बारे में बताना चाहती हूँ।

मैं एक मराठी हिन्दू परिवार में पैदा हुई हूँ। मैं अपने परिवार की प्रथम व्यक्ति थी जिसका उद्धार हुआ। सन 1998 में, मई के महिने में, कुछ व्यक्तिगत कारणों से मैंने अपने आपको आग लगा ली थी। कोई जादू-टोना की शक्तियाँ हमें आत्महत्या के लिये बढ़ावा देती थी जिसके चलते मैंने यह कदम उठा लिया था। आग लगाने के थोड़े ही देर में मैं अपने पूरे होश में आ गई थी और मैंने अपने आपको बचाने की बहुत कोशिश की, तौभी मैं लगभग आधी जल चुकी थी। सच कहूँ तो मुझे तो इस बात का आभास नहीं है परंतु जिन्होंने मुझे देखा था, उनका कहना है कि मैं लगभग मर चुकी थी। इस हादसे में मेरी 100% मौत ही थी, परंतु हमारे ही बिल्डिंग में रहने वाली एक मसीही विश्वासी महिला नें मेरे लिये प्रार्थना की और अपने चर्च के लोगों को भी प्रार्थना के लिये बुलाया। इसके कुछ देर बाद ही मैंने आँखें खोली और आज भी मैं ज़िन्दा हूँ। परंतु इस वाकये के बाद भी मैंने यीशु पर विश्वास नहीं किया था।

अगले साल 1999-2000 में, मेरी माँ की तबियत अचानक बहुत ही खराब हो गई। उनके पेट में कुछ पानी भर गया था। हमने बहुत कुछ किया और सब कुछ करके हम हार चुके थे। किसी ने हमें तब तक परमेश्वर के बारे में स्पष्ठ तौर पर नहीं बताया। हम अच्छे से अच्छे अस्पताल में माँ को लेकर गये परंतु डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया। वो भी हार चुके थे और उन्हें असल मर्ज का पता ही नहीं चल पा रहा था। हमारा साथ देने वाला कोई नहीं था। हमें डॉक्टरों से आशा थी पर उन्होंने भी जवाब दे दिया। मेरे पापा और भैया भी बहुत परेशान हो गये।

पापा के किसी दोस्त ने हमें एक ओझा बाबा के बारे में बताया कि वो मंत्र पढ़कर कुछ फूँक देगा जिससे सब ठीक हो जायेगा। हम इस प्रकार के अंधविश्वास में नहीं पड़ते मगर हालात ऐसे थे कि हम वो सब कुछ करने को तैयार हो गये जिस पर हमें कभी विश्वास नहीं था, परंतु हमें कुछ हाँसिल नहीं हुआ माँ कि तबियत बिगड़ती चली गई और अंततः डॉक्टरों ने सिर्फ 2 महिने का समय दे दिया और कह दिया कि मेरी माँ सिर्फ कुछ दिनों की मेहमान है। हम डर गये और माँ को खो देने का विचार हमको खाने लगा। हम क्या करें हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरा परिवार पूरा टूट चुका था और हमारे ह्रदय फट रहा था। हम रोना चाहते थे परंतु एक दूसरे को हिम्मत देने के लिये अपने आँसुओं को एक कोने में जाकर पोंछ लेते तौभी कभी कभी हम रो ही पड़ते थे। हमने अपने आँसू एक दूसरे के सामने नहीं दिखाये पर फिर भी माँ को पता चल ही गया कि अब वो नहीं जी पायेंगी।

माँ ने पापा से जिद करना शुरू कर दिया कि मुझे मेरे बच्चों के पास ले चलो, मेरे बच्चों को मेरे सामने देखने दो मुझे, मुझे उनके पास ले के चलो। पापा ने माँ को बहुत समझाया परंतु माँ की जिद के आगे पापा ने बात मान ली और डॉक्टर से पूछकर माँ को घर ले आये। डॉक्टर जो माँ का इलाज कर रहा था वो भी निराश हो चुका था क्योंकि वो हर दवा और इलाज लागू कर देख चुका था पर माँ की हालत ठीक ही नहीं हो रही थी। तो उसने भी कह दिया कि मुझे माफ करना, मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ, मेरी कोशिशें भी नाकाम हो गई हैं। मैं सिर्फ आपको इतना कहता हूँ कि आप खुदा पर भरोसा रखना। हम माँ को घर ले आये, और उनकी हालत बिगड़ती ही चली गई। माँ की नाभी में इतनी सूजन हो गई की उसमें से खून बहना शुरू हो गया। यह सब मैंने अपनी आँखों से देखा है। यह सब देखकर मैं अपने ही दिल से कह रही थी कि कौन है जो मेरी माँ को बचाये। कोई सच्चा ईश्वर है भी या नहीं। मैं पूरी तरह से टूट चुकी थी।

पापा पहले कभी भी शराब नहीं पीते थे परंतु इस घड़ी में जब वो एकदम हताश से हो गये तो उन्होंने शराब पीना भी शुरू कर दिया। कभी कभी उनका गुस्सा मुझ पर निकल जाता था। जब भी वो घर आते तो सारी परेशानियाँ सारा गुस्सा मेरे ऊपर उतार देते थे लेकिन मेरे पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं। मैं उनकी एक ही बेटी हूँ। मैं उनकी हिम्मत की दाद देती हूँ कि उन्होंने कभी भी अपनी पूरी हिम्मत नहीं छोड़ी और हमें संभाला, हमें अकेला नहीं छोड़ा। हमारे कुछ रिश्तेदारों ने पापा को भड़काने की भी कोशिश की कि वो दूसरी शादी कर ले पर पापा ने कह दिया कि मेरे बच्चे मर जायेंगे, मैं अपनी खुशी के लिये अपने बच्चों को मार डालूँ, यह नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मुझे मेरे बच्चे चाहिये ना कि पराई औरत। मैं अपने परिवार के साथ खुश हूँ।

समय कैसे बीत रहा था, पता ही नहीं चला। पर एक दिन हमारे घर में एक मद्रासी बहन आई और उन्होंने पूछा कि क्या वो हमारे घर का नम्बर अपने चर्च के पास्टर को दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि वो मेरे लिये और हमारी घर कि परिस्थिति के लिये प्रार्थना करेंगे। उनका विश्वास था कि परमेश्वर हमारे जीवन में अवश्य कार्य करेगा। हम सब कुछ करके थक चुके थे और कुछ भी नहीं हुआ था। मैंने कहा कि हमने सब कुछ तो करके देख लिया अब ये यीशु क्या है इसको भी आजमा लेते हैं। उन्होंने कहा कि आप भले ही सब जगह जाकर हार चुके हों, पर एक बार यीशु पर विश्वास करके देखो वो सब कुछ अच्छा ही करेगा। हम निराश हो चुके थे और अपना सब कुछ लुटा चुके थे इसलिये हमें विश्वास नहीं होता था परंतु उन्होंने कहा कि उसको तुमसे कुछ भी नहीं चाहिये, आप का पैसा या कोई भी चीज अर्पण करने की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ धन्यवाद ही करना, यही एक चीज बहुत है। हमने उनकी बात मान ली।

इस बात के पहले ही रविवार को मैं और मेरे मम्मी-पापा चर्च चले गये। पापा बता रहे थे कि वहाँ कोई फादर नहीं था और ना ही कोई रोमन कैथोलिक चर्च जैसी कोई मूर्ति उन्होंने वहाँ देखी, धूप फूल वगैरह कुछ नहीं देखा बल्कि अलग अलग धर्म के लोग वहाँ आते हैं। उन्होंने हिन्दू और मुस्लिम भाइयों को भी वहाँ देखा था।

कुछ दिनों बाद हमें पता चला कि हम पर जादू टोना किया गया था जिसके परिणामस्वरूप मेरी माँ अलग ही आवाज़ में और अलग ही हरकतें करती थी। कभी छोटे भाई के पीछे चाकू लेके भागती या कभी खुद ही दीवार पर चढ़कर कूदने की कोशिश करती थी। हमारी रातों की नींद भी उड़ गई थी। परंतु धीरे धीरे हमारे घर में प्रार्थना सभा शुरू हो गई। चर्च के कुछ भाई लगातार आते रहे और माँ के लिये उपवास और प्रार्थना करते थे। वो सब मिलकर परमेश्वर से विनती करते थे। एक दिन प्रार्थना के दौरान एक भाई  ने माँ से पूछा कि उनको क्या दिखता है तो माँ ने बताया कि एक व्यक्ति बाँहें फैलाये खड़ा है, और उसकी उपस्थिति बहुत ही मोहक है और उसने मुझसे बात की है। तो उस भाई ने कहा कि बहन, अब आप ठीक हो गई हैं और इसी हफ्ते में आपकी बीमारी ठीक हो जायेगी। प्रभु ने आपके जीवन में एक चमत्कार कर दिया है।

एक दिन परमेश्वर की महिमा हमारे घर में उतर आई। घर पर ही मम्मी के पेट से पानी निकल पड़ा। मेरी माँ डर गई और मुझसे कहने लगी, की अब तेरे भाइयों को और पापा को तेरे हाथ में सौंपती हूँ, उनको संभालना, मेरे मरने का समय आ चुका है, मेरी बेटी तुम कभी शादी नहीं करना। मेरे दिल में आवाज़ आई कि प्रभु यीशु मसीह मेरी माँ के शरीर में काम कर रहा है और मैं तुरंत कहने लगी कि प्रभु यीशु तुम्हें चंगा कर रहा है। देखो वो महान कार्य कर रहा है, तुम मरोगी नहीं पर जीवित रहोगी, हमारे साथ। मैंने तुरंत ही पापा और चर्च के अपने भाई को बुला लिया। वो दिन 13 जनवरी का था जो मेरी स्मृति में अमर हो गया है जब मेरी माँ को चंगाई मिली।

उस दिन से लेकर आज तक हम खुश हैं। हमारे चेहरे पर रोशनी चमकी और तब से हमारा विश्वास परमेश्वर में और बढ़ गया। मेरे भाई ने स्वर्गदूतों को देखा कि वो हमारे साथ है। फिर हम हमेशा कलीसिया में प्रभु यीशु का सत्संग सुनने जाने लगे और मेरा परिवार बच गया। हमने परमेश्वर की अद्भुत महिमा देखी है और इसलिये अब हमारे घर के सभी सदस्य अपने इस प्रेमी परमेश्वर की सेवा में लगे हैं।

यदि आप इस जीवन साक्षी को पढ़कर आशीषित और धन्य महसूस करते हैं तो आप हमें लिख सकते हैं। यदि आप ऐसी किसी परेशानी से होकर गुज़र रहे हैं तो आज ही प्रभु यीशु पर विश्वास करें और इस प्रकार प्रार्थना करें -

"प्रिय प्रभु यीशु, आज मैंने जाना है कि आप जीवित, प्रेम करने वाले और आश्चर्यकर्म करने वाले, प्रार्थना सुनने वाले महाना ईश्वर हैं। प्रभु मैं भी गंभीर समस्या में हूँ, परंतु मैं विश्वास करता हूँ कि आप मुझे छुड़ सकते हैं। मैं आप पर विश्वास करता हूँ और आपके पीछे चलना चाहता हूँ। मेरी सहायता करें। मेरी प्रार्थना सुनने के लिये धन्यवाद। प्रभु यीशु के नाम से माँगती/माँगता हूँ।"

* लेखक के कहने पर नाम बदल दिया गया है

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 "Anyone who believes in the Son of God has this testimony in his heart..."

[1 John 5:10]