• Z - songs starting with Z

    Zanzeero’n ko todta hai
    ज़ंजीरों को तोड़ता है

      जंज़ीरों को तोड़ता है [E]ज़ंज़ीरों को [A]तोड़ता [E]है [E]तूफां के रुख [A]मोड़ता [E]है [E]यीशु, [A]यीशु, [B]यीशु, [E]यीशु [E]रिश्ता हमसे [A]जोड़ता [E]है [E]और ना तन्हा [A]छोड़ता [E]है [E]यीशु, [A]यीशु, [B]यीशु, [E]यीशु [E]ज़ंज़ीरों को [A]तोड़ता [E]है [E]तूफां के रुख [A]मोड़ता [E]है [E]यीशु, [A]यीशु, मेरा [B]यीशु [E]यीशु [E]जब मैं [B]दुआ में, तुझको [A]बुलाऊँ तुझको [A]बुलाऊँ, पास अपने [E]पाऊँ [E]बंधन सारे [A]तोड़ता [E]है [E]रब से हमको [A]जोड़ता [E]है [E]यीशु, [A]यीशु, [B]यीशु, [E]यीशु ज़ंज़ीरों को… [E]रूह में [B]बसा है, जाँ में [A]बसा है उसकी [A]सच्चाई जग में [E]सदा है [E]रूह की बातें [A]बोलता है[E] [E]राज़ वो गहरे [A]खोलता है[E] [E]यीशु, [A]यीशु, मेरा [B]यीशु [E]यीशु ज़ंज़ीरों को… [E]नाम [B]यीशु का जिसने [A]पुकारा जिसने [A]पुकारा, पाया…

  • S - songs starting with S

    Saari srishti ke malik
    सारी सृष्टि के मालिक तुम्ही हो

      सारी सृष्टि के मालिक तुम्हीं हो [G]सारी सृष्टि के [C]मालिक तुम्हीं [G]हो सारी सृष्टि के रक्षक तुम्हीं [C]हो [D]करते हैं तुझको सादर प्रणाम [C]गाते हैं तेरे ही गुण[G]गान हा-हा-हा – [C]हालेलुयाह[D] हा-हा-हा – [G]हालेलुयाह[Em] हा-हा-हा – [Am]हालेलुयाह[D] हा-हा-हा – [G]हालेलुयाह[G7] [G]सारी सृष्टि को [C]तेरा सहारा[G] सारे संकट से हमको [C]बचाना [D]तेरे हाथों में जीवन हमारा है [C]अपनी राहों पर हमको [G]चलाना हा-हा-हा… [G]हम हैं तेरे [C]हाथों की रचना[G] हम पर रहे तेरी [C]करुणा [D]तन, मन, धन हमारा तेरा है [C]इन्हें शैतां को छूने न [G]देना हा-हा-हा… [G]अब दूर नहीं [C]है किनारा[G] धीरज को हमारे [C]बढ़ाना [D]जीवन की हमारी इस नैया को [C]भवसागर में खोने न [G]देना हा-हा-हा… Saari srishti…

  • Gospel Tracts

    Satyamev Jayate

    सत्यमेव जयते  सत्यमेव जयते – अर्थात सत्य की सदा जीत होती है। हम इस बात पर विश्वास करते हैं और इसी कारण बहुत से त्योंहार मनाते हैं। कुछ त्योंहारों में हम परस्पर असत्य पर सत्य की विजय को प्रतिबिंबित करते हैं और इसीलिये उत्सव में शामिल होते हैं। हम आनंद मनाते हैं और उससे जुड़े कई तरह के रीतिरिवाज भी पूरे करते हैं। सच तो यह है कि हम चाहते तो हैं कि सत्य की ही अंत में जीत होनी चाहिये, परंतु सत्य से ही अनजान हैं। मेरा मानना है कि सामान्यतया मनुष्य की रुचि सत्य में ही होती है। झूठ को कोई सुनना पसंद नहीं करता। हाँ, यह बात…