• Aatmik Sandesh Blogs

    शरीर, प्राण और आत्मा – दर्द का अनुभव

    शरीर, प्राण और आत्मा – दर्द का अनुभव कल एक अच्छा सवाल मेरे सामने आया। मैं बहुत बार यह बताता हूँ कि दर्द का अनुभव शरीर को नहीं लेकिन आत्मा को होता है। हालांकि शरीर को कोई गर्म चीज छू जाये तो हम उछल पड़ते हैं तो भी अगर दर्द का अनुभव शरीर को ही होता तो मुर्दों को जब चिता पर रख कर जला दिया जाता है तो उस को उठकर भागना चाहिये परंतु प्राण और आत्मा शरीर से निकल जाने के बाद शरीर की सभी क्रियाएं और अनुभव खत्म हो जाते हैं। मरने के बाद शरीर को जला दो, या काट दो (पोस्टमॉर्टम) उसे किसी प्रकार के दर्द…

  • Gospel Tracts

    Satyamev Jayate

    सत्यमेव जयते  सत्यमेव जयते – अर्थात सत्य की सदा जीत होती है। हम इस बात पर विश्वास करते हैं और इसी कारण बहुत से त्योंहार मनाते हैं। कुछ त्योंहारों में हम परस्पर असत्य पर सत्य की विजय को प्रतिबिंबित करते हैं और इसीलिये उत्सव में शामिल होते हैं। हम आनंद मनाते हैं और उससे जुड़े कई तरह के रीतिरिवाज भी पूरे करते हैं। सच तो यह है कि हम चाहते तो हैं कि सत्य की ही अंत में जीत होनी चाहिये, परंतु सत्य से ही अनजान हैं। मेरा मानना है कि सामान्यतया मनुष्य की रुचि सत्य में ही होती है। झूठ को कोई सुनना पसंद नहीं करता। हाँ, यह बात…

  • Gospel Tracts

    Apka mulya chukaya gaya hai
    आपका मूल्य चुकाया गया है

    “क्योंकि पाप का मूल्य तो बस मृत्यु ही है जबकि हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनंत जीवन परमेश्वर का वरदान है।” पुरातन ग्रंथ और आध्यात्मिक धर्मशास्त्र कहते हैं कि पूरी मानव जाति पाप के अंधकार में फंस कर अपने सृष्टिकर्ता के सान्निध्य से दूर हो गई है। हर प्रकार के पाप की क्षमा के लिये शुद्ध तथा निष्कलंक रक्त का बहना ज़रूरी है, क्योंकि लहू में जीवन होता है। कोई पशु पक्षी आदि का लहू नहीं परंतु परम पवित्र परमात्मा (सृष्टिकर्ता परमेश्वर) के लहू बहाने से ही सर्व मानवजाति का पाप क्षमा हो सकता है।