• Articles

    How To Read The Bible For Better Understanding

    I have written few books and I am sure I am the best person who can explain every single word and sentence that I have written in my books. Bible is written by the Holy Spirit of God through human hands who were inspired to write what God wanted, who can be a better teacher than God himself to teach us what he wrote and what he meant. All Scripture is God-breathed and is useful for teaching, rebuking, correcting and training in righteousness, so that the servant of God[a] may be thoroughly equipped for every good work. – 2 Timothy 3:16-17 The Bible is not a mere book (or collection…

  • Gospel Tracts

    Prayshchit ya pashchatap

    प्रायश्चित या पश्चाताप   “तुम जो यह करने जा रहे हो यह ठीक नहीं, यह गलत है, यह झूठ है, यह पाखंड है”। मनुष्य का विवेक अनेक परिस्थितियों में यह बात उसके अंतर्मन में कहता है। बचपन से हमने सीखा है कि झूठ बोलना पाप है, चोरी करना पाप है, धोखा देना पाप है – परंतु हम में से ऐसा कौन है जिसने कभी झूठ ना बोला हो, कभी भी चोरी ना की हो (चोरी सिर्फ धन की ही नहीं होती – समय की चोरी, कामचोरी, किसी को किये जाने वाले धन्यवाद की चोरी भी चोरी ही है), क्या हम में कोई है जिसने कभी किसी को धोखा न दिया…

  • Gospel Tracts

    Apka mulya chukaya gaya hai
    आपका मूल्य चुकाया गया है

    “क्योंकि पाप का मूल्य तो बस मृत्यु ही है जबकि हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनंत जीवन परमेश्वर का वरदान है।” पुरातन ग्रंथ और आध्यात्मिक धर्मशास्त्र कहते हैं कि पूरी मानव जाति पाप के अंधकार में फंस कर अपने सृष्टिकर्ता के सान्निध्य से दूर हो गई है। हर प्रकार के पाप की क्षमा के लिये शुद्ध तथा निष्कलंक रक्त का बहना ज़रूरी है, क्योंकि लहू में जीवन होता है। कोई पशु पक्षी आदि का लहू नहीं परंतु परम पवित्र परमात्मा (सृष्टिकर्ता परमेश्वर) के लहू बहाने से ही सर्व मानवजाति का पाप क्षमा हो सकता है।