Aanandit raho Prabhu me
आनंदित रहो प्रभु में

GMajor_alternate Eminor DMajor CMajor BminorMP3_na


आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो

[G]आनंदित [C]रहो प्रभु में [D]आनंदित [Em]रहो
मैं
[C]फिर से कहता [D]हूँ
सदा
[C]आनंदित रहो[G]

[G]जब तुम्हारा मन [C]बोझिल हो
[D]चलते चलते [C]थक गये [G]हो
[Bm]अपना बोझ [C]प्रभु पर डाल दो
[D]उसको है [C]तुम्हारा [G]ख़्याल

[G]आनंदित रहो…

[G]जब तुम्हारा प्राण [C]व्याकुल हो
[D]जीवन में [C]निराशा [G]हो
[Bm]रखो अपना [C]भरोसा प्रभु पर
[D]जीवन को [C]आनंद से [G]भरेगा

[G]आनंदित रहो…

[G]जब तुम्हें लोग [C]सताया करें
[D]मेरे कारण [C]तुम्हारी निंदा [G]हो
[Bm]हिम्मत ना हारो [C]सब कुछ सह लो
[D]स्वर्ग में है [C]तुम्हारा बड़ा [G]प्रतिफल

[G]आनंदित रहो…

Aanandit raho Prabhu mei aanandit raho

[G]Aanandit [C]raho Prabhu mei [D]aanandit [Em]raho
mai
[C]phir se kahta [D]hoon
sada
[C]aanandit raho[G]

[G]jab tumhara man [C]bojhil ho
[D]chalte chalte [C]thak gaye [G]ho
[Bm]apna bojh [C]Prabhu pe daal do
[D]usko hei [C]tumhara [G]khayal

[G]aanandit raho…

[G]jab tumhara pran [C]vyakul ho
[D]jeevan mei [C]niraasha [G]ho
[Bm]rakho apna [C]bharosa Prabhu par
[D]jeevan ko [C]aanand se [G]bharega

[G]aanandit raho…

[G]jab tumhe log [C]sataya karein
[D]mere kaaran [C]tumhari ninda [G]ho
[Bm]himmat na haro,[C] sab kuch sah lo
[D]swarg me hei [C]tumhara bada [G]pratifal

[G]aanandit raho…


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Satyamev Jayate

सत्यमेव जयते

 सत्यमेव जयते – अर्थात सत्य की सदा जीत होती है। हम इस बात पर विश्वास करते हैं और इसी कारण बहुत से त्योंहार मनाते हैं। कुछ त्योंहारों में हम परस्पर असत्य पर सत्य की विजय को प्रतिबिंबित करते हैं और इसीलिये उत्सव में शामिल होते हैं। हम आनंद मनाते हैं और उससे जुड़े कई तरह के रीतिरिवाज भी पूरे करते हैं। सच तो यह है कि हम चाहते तो हैं कि सत्य की ही अंत में जीत होनी चाहिये, परंतु सत्य से ही अनजान हैं।

मेरा मानना है कि सामान्यतया मनुष्य की रुचि सत्य में ही होती है। झूठ को कोई सुनना पसंद नहीं करता। हाँ, यह बात और है कि यदाकदा स्वार्थवश हम झूठ बोल देते हैं। उदाहरणतया, जो लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं क्या वे अपने भविष्य का सत्य जानना नहीं चाहते हैं। कौन उनसे झूठ सुनने के लिये जाता है? अपने बच्चे से कोई झूठ सुनना पसंद नहीं करता; गलती भी हो जाये और बच्चा सच बोले तो संभव है कि मार से बच जाये परंतु झूठ बोले और पता चल जाये कि झूठ है तो जो हाथ में आये उससे पिटाई करने में माँ-बाप पीछे नहीं हटते। पुलिस वाले सच उगलवाने के लिये क्या क्या नहीं करते? यदि आपको पता चल जाये की सामने वाले झूठ बोल रहा है तो क्या आपकी रूचि उसकी बात में रहती है? कई लोग कहते हैं कि किसी की भलाई के लिये बोला गया झूठ ‘झूठ’ नहीं होता। यह सुनने में तो अच्छा है लेकिन अपने आप में असत्य बात है। कुल मिलाकर हम झूठ पसंद नहीं करते, परंतु जो शाश्वत जीवन का सत्य है उससे ही अनजान बैठे रहते हैं, उसे खोजते ही नहीं, और मिथ्या संसार में मन लगाये रहते हैं। Continue Reading