Aao Abdi baap se
आओ अब्दी बाप से बातें करें

 

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आओ अब्दी बाप से बाते करें (गुलाम अब्बास)

आओ अब्दी बाप से बाते करें – 2
पेश अपनी हम मुनाजातें करें – 2
आओ अब्दी बाप से बातें करें – 2

दर्मियाँ पर्दा था जो वो हट चुका – 3
आओ अब उससे मुलाकातें करें – 2
पेश अपनी हम मुनाजातें करें – 2
आओ अब्दी बाप से बातें करें – 2

लम्हा लम्हा हो ज़बां पर अल मसीह – 3
यूँ दुआ मे हम बसर राते करें – 2
पेश अपनी हम मुनाजातें करें – 2
आओ अब्दी बाप से बातें करें – 2

Aao abdi baap se baaten karen

Aao abdi baap se baatein karein – 2
pesh apni hum munajaate karein – 2
aao abdi baap se baatein karein – 2

darmiya’n parda tha jo woh hat chuka – 3
aao ab usse mulakaatein karein – 2
pesh apni hum munajaatein karein – 2
aao abdi baap se baatein karein – 2

lamha lamha ho zabaan par al Masih – 3
yun dua me hum basar raatein karein – 2
pesh apni hum munajaatein karein – 2
aao abdi baap se baatein karein – 2


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Prayshchit ya pashchatap

प्रायश्चित या पश्चाताप

 

“तुम जो यह करने जा रहे हो यह ठीक नहीं, यह गलत है, यह झूठ है, यह पाखंड है”।

मनुष्य का विवेक अनेक परिस्थितियों में यह बात उसके अंतर्मन में कहता है। बचपन से हमने सीखा है कि झूठ बोलना पाप है, चोरी करना पाप है, धोखा देना पाप है – परंतु हम में से ऐसा कौन है जिसने कभी झूठ ना बोला हो, कभी भी चोरी ना की हो (चोरी सिर्फ धन की ही नहीं होती – समय की चोरी, कामचोरी, किसी को किये जाने वाले धन्यवाद की चोरी भी चोरी ही है), क्या हम में कोई है जिसने कभी किसी को धोखा न दिया हो। असल में हम सबने पाप किया है और समय बेसमय जब हम कुछ गलत करने चलते हैं तो हमारा अंतर्मन हमें चेताता है। हमारा विवेक ईश्वर का दिया हुआ वरदान है जो हमें पाप अर्थात ईश्वर की मर्ज़ी के विरुद्ध काम करने से रोकने की कोशिश करता है। हम अपने विवेक की नहीं सुनते परंतु अपने चंचल मन की सुनते है, पाप कर बैठते हैं और फिर अपने मन को तसल्ली देते हैं कि यह तो छोटा पाप है – हमने कोई हत्या थोड़ी की है, मैंने किसी की ज़मीन थोड़ी हड़प ली है, मैंने किसी को व्यवसाय में धोखा थोड़ी दिया है, मैंने कहाँ किसी महिला की आबरू लूटी है। मैंने जो किया यह तो बहुत छोटी बात है, सब ही तो करते हैं, मैं कोई निराला थोड़े ही हूँ – मैंने कोई बड़ा पाप तो नहीं किया – मैं तो साधारण सा सरल सा जीवन जीने वाला व्यक्ति हूँ – मैं तो किसी का न बुरा सोचता हूँ ना करता हूँ – अपने काम से काम रखता हूँ, ईश्वर को सुबह शाम याद करता हूँ। यह बात तो सही है कि ‘सभी तो करते हैं’ – परंतु इसके कारण सभी दोषी भी हैं, सभी पापी हैं। सब अगर गलत करते हैं तो ‘गलत’ सही तो नहीं बन जाता। हम कभी-कभी अपने आप को यह भी तसल्ली देते हैं कि जब सभी करते हैं तो देखा जायेगा, जो सबके साथ होगा वो मेरे साथ भी हो जायेगा। Continue Reading