व्यक्तिगत गवाहियाँ (जीवन साक्षी)

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आशाहीन को ईश्वर में आशा
| बृजेश चोरोटिया

मैं अत्यंत आशाहीन अवस्था में था। हमारे घर कि परिस्थिति बहुत नाज़ुक हो चली थी और हम घोर निराशा की ओर अग्रसर थे जिसका प्रभाव मेरी पढ़ाई पर, पारिवारिक जीवन पर तथा व्यक्तिगत जीवन पर पड़ रहा था। पापा की शराब पीने का आदत हमारे परिवार की खुशियों को दीमक की तरह चाटती जा रही थी। ऐसे में ईश्वर से हुये मेरे साक्षात्कार ने मेरे जीवन का रुख ही बदल दिया। ...

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अपराध से ईश्वर की ओर | राजकुमार कटारिया

हमारे घर में 52 देवी-देवताओं की पूजा होती थी। मेरी माँ पर काली देवी सवार होती थी और वो बहुत कुछ उसमें होकर कहती थी जिसको लोग पूजनीय मानते थे। मेरे लिये सोच का विषय यह बन गया था कि मेरी माँ जिसपर देवी की कृपा है वो हमेशा बीमार ही क्यों बनी रहती है। जब देवी उन पर सवार होती थी तो मैं खुद अपनी माँ से डर जाता था। छोटी उम्र में ही मेरे माँ-बाप ने मुझे दिल्ली में मेरी दीदी के पास रहने भेज दिया था। मुझे ढेर सारा प्यार मिलता था जिसके कारण मैं बिगड़ता चला गया और एक दिन मैं अपराध के दलदल में घुटनों तक फँसा हुआ था... 

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अनपेक्षित जगह पर ईश्वर से मिलाप | संजय अरोड़ा (दुबई)

फिर भी 2005 में अपने बिज़नेस को ठीक करने और कर्ज़ा चुकाने की नियत से जब वे फिर से दुबई आये तो उनके खिलाफ कई रिपोर्ट की जा चुकी थीं जिनके कारण एयरपोर्ट से ही उनको पकड़ लिया गया और उन पर केस चले। उन्हें जेल की भी मुँह देखना पड़ा और फिर उनका समय कैसे कैसे गुजरा और परमेश्वर ने उनको और उनकी परिस्थितियों को कैसे बदला और कैसे उनका साक्षात्कार जीवित ईश्वर प्रभु यीशु के साथ हुआ यह जानने के लिये उनकी अपनी आवाज़ में उनकी गवाही सुनिये।

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मौत से आमना सामना | शारोन परवेज़

वो एक संडे का दिन था। जब सभा लगभग खत्म होने को थी। आखिरी गीत चल रहा था और पास्टर साहब दरवाज़े की ओर चले। तभी चंद लोग (5-7) बन्दूकें लेकर चर्च में घुसे और उन्होंने पास्टर को अपनी बाइबल फ़ैंक देने के लिये बोला। पास्टर ने जब मना किया तो उन्होंने उनके माथे पर गोली मार दी। पास्टर उसी समय गिर पड़े और खुदा के पास चले गये। फ़िर उन लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। उस दिन लगभग 35-40 लोग चर्च में थे। मैं और मेरा परिवार भी आगे की ओर बैठे थे। जब हमने फायरिंग का शोर सुना तो हम आगे की ओर भागने लगे...

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ब्लड कैंसर की हार - बीमारी से छुटकारा | शुभांग (दुबई)

मेरी पत्नि ICU में शुभांग के पास बेठी दिन और रात बाइबल पढ़ती रही और प्रभु यीशु के नाम से मांगती रही कि प्रभु यीशु, आपके कोड़े खाने से हमारा बेटा चंगा हो गया है”. बहुत से लोग हमारे बेटे के लिये दुआ कर रहे थे। रातोंरात के ऐसा आश्चर्यकर्म हुआ जिसका हममें से किसी को भी अंदेशा नहीं था। प्रभु यीशु पर विश्वास और उनके वचन की सामर्थ ने उन ही दवाइयों को जो बेकार हो चुकी थी हमारे बेटे पर काम करवाना शुरू कर दिया। एकाएक उसके प्लेटलेट संख्या 480000 तक पहुँच गई। शुभांग ने आँखें खोल दी।

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परिवार जिसने चंगाई का चमत्कार देखा | Anonymous

अगले साल 1999-2000 में, मेरी माँ की तबियत अचानक बहुत ही खराब हो गई। उनके पेट में कुछ पानी भर गया था। हमने बहुत कुछ किया और सब कुछ करके हम हार चुके थे। किसी ने हमें तब तक परमेश्वर के बारे में स्पष्ठ तौर पर नहीं बताया। हम अच्छे से अच्छे अस्पताल में माँ को लेकर गये परंतु डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया। वो भी हार चुके थे और उन्हें असल मर्ज का पता ही नहीं चल पा रहा था। हमारा साथ देने वाला कोई नहीं था। हमें डॉक्टरों से आशा थी पर उन्होंने भी जवाब दे दिया...

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अग्नि से पवित्र किया विश्वास | आरती मोदी

हमनें उनसे बात की लेकिन मेरी दादीजी, ताऊजी, चाचाजी आदि सारा परिवार हमारे घर आ गये और हमसे पूछ-ताछ करने लगे कि तुम्हारे घर का मंदिर कहाँ है। हमने सारी बातें उनको विस्तार से बताई, उन्हें प्रभु यीशु मसीह के बारे में भी बताया लेकिन वो सब हमारे विरोध में खड़ो हो गये। इसके बाद वो हम पर और ज्यादा जोर जबरदस्ती करने लगे, हमें गालियाँ देने लगे, हमें जान से मार डालने की धमकियाँ देने लगे, हमारा मजाक उड़ाने लगे। वो हमारे ही घर में रहते रहे और हमें एक किनारे धकेल दिया। हमें समझ नहीं आ रहा था कि यह एकदम से हमारे साथ क्या हो रहा है...

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बेटी को ब्लड कैंसर से और हमें पापों से मुक्ति मिली | इंदर मूलचंदानी

मेरा नाम इंदर मूलचंदानी है। मैं एक हिंदु परिवार में पैदा हुआ हूँ। आज मैं आपको अपने जीवन की वह सत्य घटना बताना चाहता हूँ जिसने मेरे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। मैं आज प्रभु यीशु का विश्वासी हूँ परंतु मैंने धर्म-परिवर्तन नहीं किया, मैंने अधर्म का मार्ग छोड़कर जीवित ईश्वर के साथ एक रिश्ता बना लिया है। मेरी गवाही कुछ इस प्रकार है...

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दुष्ट आत्मा से छुटकारा | मनोज कुमार

पिताजी के रोज के इस नियम का कोई प्रतिकूल असर हमें शुरूआत में देखने को नहीं मिला, परंतु कुछ समय के बाद उस मूर्ती के अंदर जो आत्मिक शक्ति थी वह पिताजी पर हावी होने लगी। फिर वह दुष्ट आत्मा पिताजी पर समय असमय सवार होने लगी। पहले मेरे पिताजी में कोई भी बुरी आदत नहीं थी, लेकिन समय के बीतने के साथ तमाम तरह की बुरी आदतें उन्हें घेरने लगी। बीड़ी पीना, तंबाकू खाना, गुटखा खाना इस प्रकार की बुरी आदतें उन्हें लग गई। ...

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 "जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा"

[मरकुस 16:16]

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