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है दी आवाज़ फरिश्तो ने
है दी आवाज़ फरिश्तो ने
ज़मी के लोगो को,
उतर आया जहाँ में अब
खुदा इंसान बन के
है दी आवाज़
वो आया है गुनाह की कैद से
आजा़द करने को
जो उजडे़ ज़िदंगी के बाग
उन्हें आबाद करने को
न हो मायूस खुदा आया
उमीदो का जहाँ बनके
उतर आया जहाँ में अब
खुदा इंसान बन कर
है दी...
जो बैठे है अंधेरो में
वो आये रौशनी ले ले
गमों में रहने वाले ज़िदंगी की
हर ख़ुशी ले ले
वो आया है खुदा इंसान,
मेहरबान बनके
उतर आया जहाँ में अब
खुदा इंसान बन कर
है दी...
हमारे वास्ते वो आसमानी
प्यार लाया है
नया जीवन नयी राहें
नया संसार लाया है
कभी जो ख़त्म न हो आया
ऐसी दास्ताँ बनके
उतर आया जहाँ में अब
खुदा इंसान बन कर
है दी...
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