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Does God show partiality?

क्या परमेश्वर यहूदी औऱ अन्यजाति में भेद करता है?

बहुत बार विश्वासी भाई-बहन भी इस बात पर विचलित होते हैं और यह प्रश्न पूछते हैं कि परमेश्वर ने सिर्फ यहूदियों को क्यों चुन लिया। प्रभु यीशु ने कई बार ऐसा क्यों बोला कि इस्रायल की भेड़ को छोड़ वो किसी के लिये नहीं भेजे गये। यह सवाल भी कई विश्वासी भाई-बहन पूछते हैं कि प्रभु यीशु ने चेलों को क्यों कहा कि सिर्फ यहूदियों को ही सुसमाचार सुनाना और अन्यजातियों को क्यों नहीं। अनेक अविश्वासी भाई बहन इस बारे में विवाद करते हैं कि इस्रायलियों को छोड़कर अन्यजाति अर्थात भारतीय समाज, हिंदू व मुस्लिम लोगों के लिये मसीह का सुसमाचार है ही नहीं – क्योंकि बाइबल के अनुसार ईश्वर की योजना यहूदियों के विषय में ही थी, ऐसा बहुतों का विचार है।

रोमियों की पुस्तक का तीसरा और चौथा अध्याय पढ़ते हुए मुझे इस बात का बिलकुल स्पष्ट जवाब मिला। रोमियों 4:9-11 और 16 वचन को पढ़ने से हमें पता चलता है कि परमेश्वर ने यहूदी जाति को नहीं बल्कि एक अन्यजाति मनुष्य अब्राहम को चुन लिया और उससे एक वादा किया। परमेश्वर उसको आशीष देना चाहता था और उसके वंश को बहुत बढ़ाना चाहता था। इस बात को हम उत्पत्ति की पुस्तक उसके 12 अध्याय में पढ़ सकते हैं। इस बात पर ध्यान दिजीये कि जब परमेश्वर ने अब्राहम से बात की और उससे वायदा किया तब वो यहूदी नहीं था, किसी धार्मिक व्यवस्था का पालन करने वाला नहीं था और किसी विशेष जाति का अगुवा नहीं था।

एक सामान्य अन्यजाति आदमी को परमेश्वर ने चुन लिया। यह ठीक वैसे ही है जैसे कि यदि आप आज यीशु मसीह के विश्वासी न भी हों और इस वचन को जिज्ञासावश ही पढ़ रहे हों तो भी परमेश्वर का वचन और उसकी आवाज इस लेख के द्वारा आप तक पहुँच गई। परमेश्वर ने आपको चुन लिया कि आप उसकी बातों को सुने, सीखें और परमेश्वर की इच्छा को जानें। व्यवस्था के पालन का विशेष सूचक ‘खतना’ इस समय तक प्रचलन में नहीं आया था। खतना और सभी व्यवस्था बाद में मूसा के द्वारा परमेश्वर ने यहूदी जाति को दी जो कि अब्राहम के वंशज थे।

परमेश्वर ने अब्राहम को चुन कर उससे बात की। विशेष बात यह है कि अब्राहम ने इस बात पर विश्वास कर लिया और बिना कोई प्रश्न किये अपने देश और परिजनों को छोड़कर अपने परिवार सहित उस देश की खोज में निकल गया जिसका वायदा परमेश्वर ने उससे किया। आज सवाल यह है कि जब आपको यह बुलाहट और प्रभु यीशु पर विश्वास करके अनंतवास के लिये परमेश्वर के राज्य का न्योता जब आपको मिला है – क्या बिना सवाल किये आप विश्वास करके उसके पीछे चलने को तैयार हैं।

यदि आप अब तक ऐसा सोचते भी थे कि परमेश्वर ने तो यहूदी जाति को बुला लिया और चुन लिया तो भी आज आपका यह संशय दूर हो जाना चाहिये। रोमियों की पुस्तक के 4 अध्याय और वचन 9-11 में ऐसा लिखा है कि अब्राहम के लिये उसका विश्वास धार्मिकता गिना गया। इसका अर्थ उन्हीं वचनों में बताया गया है कि वो एक व्यवस्थापालक होने के कारण नहीं चुना गया बल्कि खतनारहित दशा में चुना गया – जिसका अर्थ यह भी है कि वह किसी धार्मिक व्यवस्था या जाति विशेष का होने के कारण नहीं चुना गया बल्कि अपनी बुलाहट को विश्वास से स्वीकार करने के कारण चुना गया।

अब्राहम के विश्वास के कारण परमेश्वर ने अपना वायदा उसके जीवन में पूरा किया और उसके वंश को बढ़ाया जो कि बाद में यहूदी जाति बना। परमेश्वर ने अब्राहम के वंशजों को भी आशीष देने का वायदा किया था और इसलिये बाद में वह जाति परमेश्वर की नज़दीकी और आशीषों का लाभ उठाती रही। इसीलिये प्रभु यीशु ने अपनी योजना को उनके बीच में से पूरा करना शुरू किया और पौलुस व पतरस को प्रेरणा देकर संसार की हरेक जाति तक अपने उद्धार का संदेश पहुँचाया।

परमेश्वर की योजना शुरु से हरेक मनुष्य के लिये रही है। इसलिये, यदि आप एक विश्वासी हैं तो यह संशय मन से निकाल दीजिये और आनंद के साथ परमेश्वर के पीछे चलिये। और यदि आप अब तक विश्वास नहीं करते थे तो आज आपके लिये विश्वास करने का निमंत्रण है। अपने पापों की क्षमा और मुक्ति (उद्धार) का आनंद प्राप्त करने के लिये प्रभु यीशु पर विश्वास करिये।

प्रभु आपको आशीष दें