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कोरोनावाइरस – अंत समय में परमेश्वर की चेतावनी

कोरोनावाइरस – अंत समय में परमेश्वर की चेतावनी

– गिरिजेश वर्मा

कोरोना वायरस हर तरफ इस भयावह वायरस की चर्चा है, एक ऐसा सूक्ष्म वायरस जो हमें दिखाई तक नही देता, परंतु जिसने वैश्विक स्तर पर 14,510 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। इसी अतिसूक्षम वायरस ने 3,32,930 से अधिक लोगों को संक्रमित कर दिया है। ये आँकड़े तब हैं जब कि मैं यह आर्टिकल लिख रहा हूं और ये लगातार बढ़ रहे हैं।

शहर के शहर लॉक डाउन कर दिए गए हैं और सब लोग अपने अपने घरों पर है। WHO ने इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है। विश्व भर में इसके केस लगातार बढ़ते ही जा रहे है, जिससे लोगों में इस वायरस का डर भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सभी की निगाहें मेडिकल साइंस पर है कि जल्दी से जल्दी कोई दवा या वैक्सीन (टीका) का इज़ाद हो ताकि लोग जो इस वायरस के कारण इतने कम समय में मारे जा रहे है, उनकी जान बचाई जा सकें।

इस माहौल को देख कर मुझे मेरे एक मित्र की बात याद गयी, जिन्होंने कहा था ईश्वर जैसी कोई चीज़ नही है। उसका मानना था कि आज विज्ञान सब कुछ कर सकता है। कुछ समय तक यह बात परमेश्वर पर विश्वास न करने वालों के लिए सही प्रतीत होती थी पर आज इस वायरस के सामने मेडिकल साइंस भी पंगु साबित हो रहा है और विज्ञान भी इसका जवाब नही दे पा रहा है।

एक और सवाल मेरे मित्र ने मुझसे किया था वो यह है कि अगर सच में ही कोई ईश्वर है तो संसार में इतना दुःख क्यों है, बीमारियाँ क्यों है? अगर ईश्वर है तो वो लोगों को बचाता क्यों नहीं?

मेरे ख्याल से यही वो समय होता हैं जब हम अपने आप को परिस्थिति के सामने निःसहाय पाते हैं, हमारे पास ईलाज नही होता है, तभी हमें अपनी निर्बलता का बोध होता है। हमारा पैसा, हमारी ताक़त और हमारे संसाधन सीमित हो जाते है। इसी समय हम अपने आप से और संसार से अलग सच्चे परमेश्वर की और देख पाते हैं। यह बिल्कुल उचित समय है जब हम मृत्यु के बाद के जीवन को सोच सकते हैं। विश्व के दूसरे सबसे बेहतर मेडिकल सुविधा वाला देश इटली भी इस महामारी के आगे अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है और वहाँ के प्रधानमंत्री ने कहा है अब हमारी आशा बस परमेश्वर पर ही है।

कोरोना वायरस पहली महामारी नही है, समय समय पर हम ऐसी अलग अलग तरह की महामारियों को देख रहे है जैसे- ईबोला, स्वाइन फ्लू आदि। और परमेश्वर का वचन भी इन अंतिम समय के चिन्हों की पुष्टि करता है :-

और बड़े-बड़े भूकम्प होंगे, और जगह-जगह अकाल और महामारियाँ पड़ेंगी, और आकाश में भयंकर बातें और बड़े-बड़े चिन्ह प्रगट होंगे।
लूका 21:11

क्या ऊपर लिखी हर बातों को आप आज संसार में पूरा होते नही देख पा रहे है? क्या कोरोना वायरस हम सब के लिए चेतावनी नही?

और ये केवल एक बात नही परमेश्वर के वचन में जिन जिन भविष्यवाणीयों के विषय में बताया गया है वे सब पूरी हुई है, उदाहरण के लिए प्रभु येशु के जन्म से 700 वर्ष पुर्व उनके विषय में बाइबिल पुष्टि करती है कि उनका जन्म एक कुँवारी से होगा :-

इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी।
यशायाह 7:14

और आज जिस तरह से इस कोरोना वायरस से बचने के बारे में बताया जा रहा है, उसे भी परमेश्वर का वचन विज्ञान के विकसित होने से बहुत पहले ही बताता है :-

उदाहरण के रूप में एक ऐसी ही घटना के बारे मैं आपको बताता हूं, 1845 विएना (ऑस्ट्रेलिया) में, डॉ० इग्नाज़ सेमेंलएल्विज़ ने पाया कि उनके अस्पताल में 30% नवजात शिशुओं की मृत्यु होती जा रही थी। उन्होंने पाया कि वहाँ के डॉक्टर किसी मृतक के निरीक्षण करने के बाद उन्हीं हाथों को बगैर धोए, गर्भवती महिलाओं का निरीक्षण कर लेते थे। इस सब बातों को अवलोकन करने पर डॉ० इग्नाज़ ने वहाँ के सभी डॉ० को हाथ धोने के बाद निरीक्षण करने निर्देश दिए। जिसके बाद पाया गया कि वहाँ के नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में बहुत तेज़ी से गिरावट आई थी। ये वो समय था तब साइंस माइक्रो विज्ञान से अनभिज्ञ था, उस समय के लोग बैक्टीरिया आदि से अनजान थे। परन्तु आप ये जान कर हैरान होंगे कि परमेश्वर के वचन में आज से 3500 साल पहले ही परमेश्वर ने पानी से हाथ धोने की सावधानी के विषय में बता दिया था, जिसको आज कोरोना वायरस के संक्रमण के बचाव के लिए बताया जा रहा कि हम अपने हाथ बार बार धोयें –

“और जिसके प्रमेह हो वह जिस किसी को बिना हाथ धोए छूए वह अपने वस्त्रों को धोकर जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। “फिर जिसके प्रमेह हो वह जब अपने रोग से चंगा हो जाए, तब से शुद्ध ठहरने के सात दिन गिन ले, और उनके बीतने पर अपने वस्त्रों को धोकर बहते हुए जल से स्नान करे।”
लैव्यव्यवस्था 15:11‭,13

बाइबिल प्रमेह रोग के बारे में बताती है जिसे आज हम गोनोरिया के नाम से जानते है जो कि असुरक्षित यौन संबंधों के होने से एक दूसरे में फैलता है। यह आमतौर पर तब होता है जब एक व्यक्ति एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध स्थापित करता है। क्या एक से अधिक व्यक्ति से यौन सम्बंध रखना व्यभिचार नही? क्या व्यभिचार पाप नही? क्या परमेश्वर ने व्यभिचार के दंड के रूप में इस बीमारी को होने नही दिया, ताकि लोग उस परमेश्वर को जाने जो सच्चा है, जो न्याय के सिंहासन पर विराजमान है?

आज कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को क्वारंटाइन (quarantine) किया जा रहा है जिसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति में रोग के लक्षण हो उस व्यक्ति को बाकी लोंगो से अलग रखना ताकि संक्रमण दूसरों में न फैले। क्वारंटाइन का अभ्यास 17वीं सदी से पहले विज्ञान जगत में नही आया था परन्तु इसके विषय में भी परमेश्वर का वचम हमें 3500 साल पहले ही बताता है :-

जितने दिन तक वह व्याधि (रोग) उसमें रहे उतने दिन तक वह तो अशुद्ध रहेगा; और वह अशुद्ध ठहरा रहे; इसलिए वह अकेला रहा करे, उसका निवास स्थान छावनी के बाहर हो।
लैव्यव्यवस्था 13:46

आज कोरोना वायरस से मृत्यु के भय से सब लोग चिंता में है, सभी डरे हुए है कही किसी को ये बीमारी न पकड़ लें, परंतु प्रभु हमारे शरीर से अधिक हमारी आत्मा की चिंता करता है, क्योंकि शरीर तो 70 या 80 साल बाद वैसे भी मिट जाएगा :-

“जो शरीर को मार सकते है, पर आत्मा को मार नहीं सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।”
मत्ती 10:28

परमेश्वर आपसे क्या चाहते है?

यदि मैं आकाश को ऐसा बन्द करूँ, कि वर्षा न हो, या टिड्डियों को देश उजाड़ने की आज्ञा दूँ, या अपनी प्रजा में मरी फैलाऊं, तब यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूँगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूँगा।
2 इतिहास 7:13‭-‬14

क्या आप भी अपनी आत्मा की चिंता कर रहे है? क्या आप अपने पापी होने को पहचान पा रहे है, तो आपके लिए खुशखबरी है। यीशु मसीह केवल पापियों के लिए ही इस जगत में आये थे। यदि आप अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं और पाप के प्रति जागरूक हैं तो अपने पापों पश्चाताप करके प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करिये, उनको अपना अनंत जीवनदाता मानकर प्रार्थना करिये।

क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
यूहन्ना 3:16

प्रभु यीशु का आगमन निकट है और उससे पहले इन चिन्हों का होना अवश्य है। आइये अपना मन फिरायें, स्वर्ग का राज्य निकट है:-

“देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है।”
प्रकाशितवाक्य 22:12

परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़िये और प्रभु यीशु की आज्ञाओं के अनुसार जीवन बिताइये। प्रभु आपको आशीष दें। आमीन।

गिरिजेश वर्मा