Thoughts

Thought provoking article/blog to initiate a thinking process in the reader...

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    Is spirituality old-fashioned?

    Is spirituality old-fashioned? This question is pertinent to ask because spirituality sounds old-fashioned and outdated to the modern society. This is the bare truth of the modern society. In today’s culture – fun, fashion, openness, equality and ‘something different & liberal’ trends. Today’s youth finds it odd to mingle and settle with spirituality because it looks like the thing of the aged people. Spirituality is also looked down because it appears boring, monotonous, judgmental and binding. However, the main reason is – that it has been there from the ages and only the elderly people talk about it. To a young person, it is old-fashioned and certainly not trendy. SPIRITUALITY…

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    7 कानूनी बातें जो परमेश्वर के सेवक के लिये जानना ज़रूरी है

    अंग्रेजी में पढ़ें – https://goo.gl/kvm9ef  | डाउनलोड करें – ePub | PDF टी वी में समाचार देखने पर और अपने व्यक्तिगत अनुभव से मैंने यह पाया कि मसीही प्रचारकों पर जो दोष हिंदुत्ववादी संगठनों व धर्मनिरपेक्ष समाचार-पत्रों द्वारा लगाया जाता है वह है – जबरन धर्म परिवर्तन, या अंधविश्वास फैलाकर धर्म-परिवर्तन अथवा लालच देकर धर्म-परिवर्तन करना। जो मसीही विश्वास का विरोध करते हैं, वे आत्मिक चमत्कारों को पाखंड, परमेश्वर के प्रेम व बाइबल में दी गई ईश्वर की प्रतिज्ञाओं को लालच व गरीब लाचारों को सुसमाचार सुनाकर विश्वास में लाने को जबरन धर्म-परिवर्तन का नाम देते हैं। संपूर्ण मसीहीयत को आज एक अलग आस्था के रूप में देखने के बजाय धोखाधड़ी…

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    7 legal and constitutional things which every servant of the Lord must know

    हिंदी में पढ़ें – https://goo.gl/SLWdVB | Download – ePub | PDF Upon watching various secular and extremist TV new channels as well as by my personal experience, I observed that the first and foremost allegation which is framed against Christian preachers is – “forced religious conversion” or “religious conversion by promoting superstitions” or “religious conversion by luring people”. Such people who oppose Christian faith, allege faith-miracles as propaganda, love of God and promises of the Bible as allurement, praying for the poor and downtrodden as force and overall Christianity as fraudulent practise. They have an unfounded fear created in them by politicians and fundamentalists about converting the whole India into a…

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    beginning-of-sin

    पाप की शुरुआत | Beginning of Sin पहला पाप हम जब पाप के विषय में बात करते हैं तो मानते हैं कि पहला पाप तब हुआ जब आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया और वह प्रतिबंधित फल खा लिया (भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल – सेब नहीं) जिसे खाने के लिये परमेश्वर ने आदम को मना किया था। आदम को इस बात को अत्यंत महत्वपूर्ण मानना चाहिये था और हव्वा को भी उसका महत्व समझाना चाहिये था – परंतु दोनों ने ही इस बात को हल्के में लिया और शैतान के बहकावे में आ गये – और पाप किया। असल में उन्होंने…

  • Hypocrite
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    Hypocrisy in Christianity

    मसीहीयत में दिखावा | Hypocrisy in Christianity कल जयपुर से दिल्ली गाड़ी चलाते हुए एक विचार मेरे अंदर आया। मैं प्रभु से बात करता आ रहा था और ज़ैक पुनन की सीडी भी गाड़ी में चल रही थी। उन्होंने एक छोटी सी प्रार्थना से वचन को बंद किया। मैं सोच रहा था कि प्रभु से जो हमारा रिश्ता है उसको प्रकट करने के तरीके में बहुत विविधता आ गई है। विविधता अपने आप में कोई गलत चीज़ नहीं है लेकिन एक तरफ भाई ज़ैक जैसे प्रचारक जो बहुत छोटी प्रार्थना करते हैं। और दूसरी तरफ वे जो बहुत लंबी लंबी प्रार्थना करते हैं और जिनके बोलने के तरीके में बहुत…

  • Revelation
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    क्या आदम को स्वर्ग मिलेगा?

    क्या आदम को स्वर्ग मिलेगा? हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर एक मैंबर का यह सवाल हमारे सामने आया। मेरा उत्तर: मैं सोचता हूँ कि जो परमेश्वर के वचन, राज्य और प्रभु के सानिध्य के बारे में सोचता है उसके मन में ढेरों सवाल आना स्वाभाविक भी है और ज़रूरी भी। यदि हम स्वर्ग, बाइबल और बाइबल के पात्रों के बारे में विचार नहीं करते तो हमारा विश्वास गहरा नहीं है। हम अपने उद्धार पर ही ठहर जायें और बाइबल के गहरे भेद जानने की कोशिश न करें तो हमारा मसीही जीवन व आत्मिक ज्ञान सतही रह जायेगा। इसलिये मैं सवाल पूछने वाले अपने विश्वासी भाई के इस सवाल की सराहना करता हूँ।…