Sermon Outlines,  Sermons

Sermon Outline – Categories of people in the church

SERMON OUTLINE (ENGLISH & HINDI)

Different types of people found in biblical times:

  1. Those who just WATCHED or saw the miracles but did not believe
    John 6:1, 12:42
    Likewise, there are many in the church today, who just see
  2. Those who BELIEVED
    John 2:11, 4:41,53, 7:31 – first they believed
    Acts 1:13-14,15, 3:1,7, 5:12, 12:5 – they prayed
    Acts 2:42-47 – formed a congregation and cared for each other
    “What the first century church did, the last church before rapture must too!”
  3. Those who were RELIGIOUS and LEGALIST
    John 5:12 – ignored a great miracle and questioned
    John 11:48, 12:43 – traits of religious and legalist people
    We must examine if any such trait has crept in us too.
  4. Those who were EXTREMISTS
    Matthew 12:13, 26:1-4 – tried to kill Jesus
    John 9:34, 8:48 – abused Jesus and believers
    Matthew 9: 32-34
    Such people were there 2000 years ago and they still exist. We need to show them true light by living the teachings of Jesus (Luke 6:22-28, Luke 6:35, Romans 12:14) in such adverse times.

कलीसिया में विभिन्न प्रकार के लोग

कलीसिया में, प्रथम कलीसिया से लेकर आज तक विभिन्न प्रकार के लोग पाये जाते हैं:

  1. वो जो देखते हैं परंतु विश्वास नहीं करते
    यूहन्ना 6:1, 12:42
    इसी प्रकार अनेक लोग आज भी सब आश्चर्यकर्म आदि देखते हैं, कलीसिया में आकर आराधना और प्रार्थना देखते हैं परंतु विश्वास नहीं करते।
  2. वे जिन्होंने विश्वास किया
    यूहन्ना 2:11, 4:41,53, 7:31 – पहले उन्होंने विश्वास किया
    प्रेरितों के काम 1:13-14,15, 3:1,7, 5:12, 12:5 – फिर मिलकर प्रार्थना किया
    प्रेरितों के काम 2:42-47 – एक सभा के रूप में एक दूसरे के साथ प्रेम व संगति रखी
    “जो प्रथम कलीसिया ने किया वो आखिरी कलीसिया को भी करना चाहिये!”
  3. वे जो धार्मिक थे और कट्टर हो गये थे
    यूहन्ना 5:12 – अद्भुत चमत्कार को अनदेखा किया और सवाल-जवाब करने लगे
    यूहन्ना 11:48, 12:43 – कट्टर धार्मिक लोगों के अवगुण
    हमें भी अपने आपको जाँचना चाहिये कि हममें ऐसा कोई अवगुण तो प्रवेश नहीं कर गया।
  4. वे जो अतिवादी या धार्मिक-उन्मादी थे
    मत्ती 12:13, 26:1-4 – यीशु को अनेकों बार मारने का प्रयास किया
    यूहन्ना 9:34, 8:48 – यीशु और विश्वासियों के साथ अपशब्द बोले
    मत्ती 9: 32-34 – यीशु पर दोषारोपण किया
    ऐसे लोग अनेक धर्मों में पाये जाते हैं जो कट्टर धार्मिक लोगों में से विशिष्ट रूप से आगे बढ़ जाते हैं और मार डालने या झुठे आरोप लगाने, फब्ती कसने, गाली-गलौच करने, मार-पीट करने का काम करते हैं। वे हमेशा मसीही लोगों का विरोध करने के लिये पिछले २००० सालों से इर्द-गिर्द रहे हैं। ऐसे लोगों के लिये हमें प्रार्थना करना चाहिये जैसे कि प्रभु यीशु की शिक्षा है (लूका 6:22-28, लूका 6:35, रोमियों 12:14).