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गाली के बदले आशीष

“तुम मुझे गाली दो, मैं तुम्हें आशीष दूँगा”

– बृजेश चोरोटिया

सुभाष चंद्र बोस ने कहा था – “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”

सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा है – वो भारत की आज़ादी के एक बहुत महत्वपूर्ण सिपाही थे। प्रभु यीशु हमारी आत्मिक आज़ादी के प्रणेता हैं। यीशु ने आपको और मुझे खून बहाने या अपना खून देने के लिये प्रेरित नहीं किया बल्कि स्वयं अपना खून बहाकर हमें पाप-श्राप, नर्क, सज़ा और पाप के न्याय से हमें छुड़ाया। हमें सिर्फ इतना भर करना है कि जो कीमत प्रभु यीशु ने क्रूस पर चुकाई उसपर विश्वास करें, उसे अपना लें और अपना जीवन श्रद्धापूर्वक मसीही विश्वास में बिताने के लिये समर्पित करें।

प्रभु यीशु के महान कार्यों के लिये उनको उनके समय में कभी शाबासी या आदर नहीं दिया गया। बाइबल में प्रभु यीशु के जीवन-कार्यों का वर्णन करने वाले नये नियम की प्रथम चार पुस्तकों में एक, यूहन्ना के सुसमाचार को जब हम पढ़ते हैं तो नवें अध्याय के चौंतीसवें वचन में उन पर एक लांछन लगाया गया। किसी धर्म के ठेकेदार ने इस प्रकार कहा, “तू तो बिल्कुल पापों में जन्मा है, तू हमें क्या सिखाता है?”

मेरे 22 साल के विश्वासी जीवन में अनेक ऐसे लोग मुझे मिले हैं जिन्होंने प्रभु यीशु के लिये अत्यंत घृणित व अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर भद्दी टिप्पणियाँ की हैं। मुझे गाली देने व प्रभु यीशु के लिये अपशब्दों का इस्तेमाल करके मुझे प्रताड़ित करने का प्रयास अनेकों बार किया गया है। अभी कुछ ही दिनों पहले, यू-ट्यूब पर मेरी गवाही के विडियो पर एक प्रवचन के विडियो पर भद्दी टिप्पणी की गई। प्रभु यीशु को एक वैश्या की संतान बताया गया। मैंने अपने तरीके से उसे शांत किया परंतु साथ ही परमेश्वर ने मुझे यह शीर्षक दिया जिसपर मैं अपने विचार प्रकट करूँ – “तुम मुझे गाली दो, मैं तुम्हें आशीष दूँगा”, क्योंकि यही प्रभु यीशु की शिक्षा है और यही प्रभु यीशु का तरीका है।

मुझे प्रभु यीशु की कही हुई कुछ बातें और उनके अपने जीवन में घटी घटनायें याद आईं जो कि सुसमाचार की पुस्तकों में वर्णित हैं।

शिक्षायें –

“धन्य हो तुम जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और तुम्हारी निन्दा करेंगे, और तुम्हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। “उस दिन आनन्दित होकर उछलना, क्योंकि देखो, तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है; उनके बाप-दादे भविष्यद्वक्‍ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे।
लूका 6:22-23

“परन्तु मैं तुम सुननेवालों से कहता हूँ कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उनका भला करो। जो तुम्हें स्राप दें, उनको आशीष दो; जो तुम्हारा अपमान करें, उनके लिये प्रार्थना करो।
लूका 6:27-28

… अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो…
लूका 6:35

अन्य स्थान पर प्रभु यीशु के इस संसार में, मृतकों में से जी उठने के पश्चात जब वो जीवित उठा लिये गये तो पीछे रह गये उनके चेलों ने भी ऐसी शिक्षाओं को आगे बढ़ाया –

अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो स्राप न दो।
रोमियों 12:14

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उनकी चिंता किया करो। जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो, बदला न लेना…
रोमियों 12:17-19

बुराई से न हारो, परन्तु भलाई से बुराई को जीत लो।
रोमियों 12:21

इसके अलावा और भी बहुत सी शिक्षायें हैं जो एक मसीही विश्वासी को हरेक परिस्थिति में अपना संयम कायम रखने, क्षमा करने व अपने पड़ोसी से और यहाँ तक कि अपने दुश्मनों से भी प्रेम करने के लिये प्रोत्साहित करती हैं।

प्रभु यीशु के जीवन की कुछ घटनायें

प्रभु यीशु भलाई के काम करते थे, पापों से पश्चाताप करने व परमेश्वर के स्वर्ग राज्य के विषय में सिखाते थे तो भी धर्मांध लोग उनका विरोध करते थे और यहाँ तक कि उनको मार डालने की योजना बनाते थे।

तब उसने (यीशु ने) उस मनुष्य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने बढ़ाया, और वह फिर दूसरे हाथ की तरह अच्छा हो गया। तब फरीसियों ने बाहर जाकर उसके विरोध में सम्मति की कि उसे किस प्रकार नष्‍ट करें।
मत्ती 12:13-14

इस कारण यहूदी और भी अधिक उसके मार डालने का प्रयत्न करने लगे, क्योंकि वह न केवल सब्त के दिन की विधि को तोड़ता, परन्तु परमेश्‍वर को अपना पिता कह कर अपने आप को परमेश्‍वर के तुल्य भी ठहराता था।यूहन्ना 5:18

जब यीशु ये सब बातें कह चुका तो अपने चेलों से कहने लगा, “तुम जानते हो कि दो दिन के बाद फसह का पर्व है, और मनुष्य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाया जाएगा। ” तब प्रधान याजक और प्रजा के पुरनिए काइफा नामक महायाजक के आँगन में इकट्ठा हुए, और आपस में विचार करने लगे कि यीशु को छल से पकड़कर मार डालें।
मत्ती 26:1-4

यहूदियों ने उस पर पथराव करने को फिर पत्थर उठाए। 32इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं ने तुम्हें अपने पिता की ओर से बहुत से भले काम दिखाए हैं; उन में से किस काम के लिये तुम मुझ पर पथराव करते हो?” 
यूहन्ना 10:30-32

प्रभु यीशु वो सर्वशक्तिमान ईश्वर थे जिन्होंने इस संसार की रचना की है। मनुष्य जाति के पाप मिटाने और उनका मोक्ष (उद्धार) करने के लिये वे मानव रूप में जन्में थे। उन्हें भूत, वर्तमान व भविष्य का ज्ञान था और वे जानते थे कि फरीसी और धर्मगुरू ही उन्हें षडयंत्र कर उनको क्रूर रोमी सैनिकों के हाथ पकड़वायेंगे और क्रूस की घृणित मृत्यु देंगे – तो भी प्रभु यीशु ने उनसे घृणा नहीं की, कोई प्रतिकार नहीं किया। हरेक प्रकार के लांछन, यातना व मृत्युदंड को भी उन्होंने सह लिया। परंतु मृत्यु ईश्वर पर अधिकार नहीं रखती इसलिये तीसरे दिन प्रभु यीशु मृतकों में से जी उठे और मनुष्य जाति के उद्धार का मार्ग प्रशस्त किया।

उनके विरोध में अनेकों बातें कही गई परंतु उन्होंने किसी बात का खंडन नहीं किया। उन्होंने किसी भी तरह का प्रतिकार नहीं किया।

जब वे बाहर जा रहे थे, तो देखो, लोग एक गूँगे को जिसमें दुष्‍टात्मा थी, उसके पास लाए; और जब दुष्‍टात्मा निकाल दी गई, तो गूँगा बोलने लगा। इस पर भीड़ ने अचम्भा करके कहा, “इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया।” परन्तु फरीसियों ने कहा, “यह तो दुष्‍टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्‍टात्माओं को निकालता है।”
मत्ती 9:32-34

यह सुन यहूदियों ने उससे कहा, “क्या हम ठीक नहीं कहते कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्‍टात्मा है?”
यूहन्ना 8:48

अकारण उनपर झूठे दोष लगाकर यहूदियों ने प्रभु यीशु को पकड़वा दिया और बहुत से अत्याचार उन पर किये। प्रभु यीशु ने यह सब सहकर विश्वासियों के लिये उदाहरण पेश किया – क्योंकि उन्होंने इस समय से पूर्व ही अपने चेलों को आगाह किया था कि ऐसा होगा।

परन्तु इन सब बातों से पहले वे मेरे नाम के कारण तुम्हें पकड़ेंगे, और सताएँगे, और पंचायतों में सौंपेंगे, और बन्दीगृह में डलवाएँगे, और राजाओं और हाकिमों के सामने ले जाएँगे। तुम्हारे माता-पिता, और भाई, और कुटुम्ब, और मित्र भी तुम्हें पकड़वाएँगे; यहाँ तक कि तुम में से कुछ को मरवा डालेंगे। 17मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे।
लूका 21:12, 16-17

वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन् वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा वह समझेगा कि मैं परमेश्‍वर की सेवा करता हूँ।
यूहन्ना 16:2

जो बात मैं ने तुम से कही थी, ‘दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता,’ उसको याद रखो। यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्हें भी सताएँगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्हारी भी मानेंगे। परन्तु यह सब कुछ वे मेरे नाम के कारण तुम्हारे साथ करेंगे, क्योंकि वे मेरे भेजनेवाले को नहीं जानते।
यूहन्ना 15:20-21

तो ऊपर दिये बाइबल के अंशों का सारांश यह है कि प्रभु यीशु को गालियाँ दी गई, झूठे आरोप लगाये गये, मार-पीट की गई और मार डाला गया। प्रभु यीशु ने अपने जीवनकाल में इस बारे में शिक्षा देकर अपने चेलों को भविष्य की बातें बता दी थी कि आने वाले समय में ऐसा होगा। प्रभु यीशु के बाद उनके चेलों और अनेक विश्वासियों को ऐसी ज्यादतियों का सामना करना पड़ा।

2000 साल से ये बातें अब तक हो रहीं है और विश्वासियों को हर प्रकार के मानसिक व शारीरिक सताव का सामना करना पड़ता है। इसमें कोई नई बात नहीं है। यदि आप एक विश्वासी हैं और आपको ऐसी ही यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है – तो समझिये कि यह एक आनंद की बात है क्योंकि जो प्रभु यीशु ने आपके बारे में कहा था वो पूर्ण हो रहा है। परमेश्वर के पुत्र, प्रभु यीशु की समानता में भागीदार होने का मौका आपको मिल रहा है, इससे बड़े हर्ष और सौभाग्य की बात क्या हो सकती है!

यदि मेरे साथ ये बातें होती हैं ताकि मुझे मानसिक ताड़ना का सामना करना पड़े तो मेरे मुख के वचन यही होने चाहिये – तुम मुझे गाली दो और मैं तुम्हें आशीष दूँगा।

यदि आप प्रभु यीशु से अनजान हैं और अकारण ही कभी भी आप भी उन लोगों में शरीक हुए हैं जो मसीही विश्वासियों को कष्ट पहुँचाते हैं तो इस लेखनी के द्वारा मैं आपको बताना चाहता हूँ कि प्रभु यीशु ने आपके पापों की भी कीमत चुकाई है। परमेश्वर आपसे प्रेम करते हैं और सभी मसीही विश्वासियों की तरफ से मैं भी आपसे कहना चाहता हूँ कि हम भी आपसे प्रेम करते हैं। यदि जान-बूझकर या गलतफहमी में आपने किसी मसीही विश्वासी को नुकसान पहुँचाया है तो हम आपको क्षमा करते हैं। प्रभु यीशु प्रेम व क्षमा की शिक्षा देने वाले महानायक हैं। प्रभु यीशु के अनुयाई, हम आपके लिये आशीष माँगते हैं और ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर आपको भी मुक्ति व उद्धार का आनंद दे, आपकी मन की इच्छाओं को पूर्ण करे, आपकी हरेक आवश्यकता की पूर्ति करे, आपको अच्छा स्वास्थ्य दे व आपके परिवार का कल्याण करे।