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Bible Story – The Happiest Day

JESUS ROSE FROM THE DEAD! It was the happiest day in the life of the disciples of the Lord Jesus Christ, who were becoming hopeless when their teacher was crucified on the cross. In this story video, you can watch the excitement of Jesus’ resurrection and how the event unfolded. Yeshanshi shares a personalized learning in the end, as usual.

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ख़ुशी का दिन

रविवार की सुबह, जल्दी ही उठकर बहनें उस कब्र पर पहुँच गईं जहाँ प्रभु यीशु दफ़नाये गये थे। वो सुगंधित चीज़ें लेकर आई थीं ताकि यीशु के शव पर लगा सकें। लेकिन जब वो वहाँ पहुँची, गुफा वाली कब्र तो खुली पड़ी थी, उसका बड़ा पत्थर लुढ़का हुआ था।

“इतना बड़ा पत्थर किसने लुढ़का दिया? ” वो आश्चर्य से पुछने लगीं क्योंकि किसी ने वो बड़ा पत्थर लुढ़का दिया था। कहते कहते, महिलायें अन्दर गईं और सामने देखकर उनकी साँस रुक सी गई।

यीशु का शरीर वहाँ नहीं था!

“प्रभु का शरीर तो यहाँ नहीं है! वो कहाँ गया?” वो आश्चर्य करने लगीं की यीशु का शरीर कहाँ चला गया और कौन उसे ले गया। तभी उनको वहाँ एक चमकदार स्वर्गदूत दिखाई दिया।

“डरो मत। तुम ज़िंदा व्यक्ति को मरे हुए में क्यों खोज रही हो, यीशु ज़िन्दा है। मुझे मालूम है तुम यीशु को ही खोज रही हो, जो क्रूस पर मर गये थे। लेकिन अब वो ज़िंदा हैं। परमेश्वर ने उनको ठीक वैसे ही जीवित कर दिया है जैसा यीशु ने अपने मरने से पहले ही तुमको बता दिया था। अब जाओ और सभी चेलों को भी यह बात बता दो” स्वर्गदूत ने बोला।

वो महिलायें तुरंत भागी ताकि सबको यह ख़ुशख़बरी दें। यह एक बड़ी ख़ुशी का दिन था।

वो बहनें तुरंत उस कमरे में पहुँची और बड़ी ज़ोर से चिल्लाकर बोली, “वो ज़िन्दा हैं। यीशु जीवित हो चुके हैं। एक स्वर्गदूत ने हमको बताया है। हम सुबह सुबह कब्र पर गईं थी ताकि सुगंध-द्रव्य लगा सकें लेकिन यीशु का शव वहाँ नहीं था। वो कहीं चले गये हैं।”

“यह तो पागलपन की बात है, क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है।” चेलों ने सोचा और फिर पतरस और यूहन्ना तुरंत दौड़े ताकि ख़ुद जाकर देखें। यूहन्ना तेज़ भागा और पहले उस गुफा में पहुँच गया जहाँ यीशु का शव रखा था। पीछे पीछे पतरस भी पहुँच गया। “सच में यीशु का शव तो यहाँ नहीं है!” उन्होंने आश्चर्य किया। यीशु का शरीर जहाँ कपड़ों में लिपटा था वहाँ अब कुछ भी नहीं था, बस वो कपड़ा जो यीशु के सिर पर बँधा था वो सलीके से तह करके रखा गया था। यीशु का शव भी वहाँ नहीं था। वो सच में कहीं चले गये थे।

“यीशु ज़िंदा हैं”, दौड़कर पतरस और यूहन्ना ने बाक़ी चेलों को बताया।

मरियम मगदलीनी ने यीशु को सबसे पहले देखा था। वो कब्र के पास खड़ी थी जब यीशु ने जी उठने के बाद सबसे पहले उससे बातें की थी, “तुम क्यों रो रही हो।” और मरियम की आँखें रोने से लाल हो गईं थी और सूजी हुई थी। वो पहचान नहीं सकी कि कौन उससे बात कर रहा था, उसने समझा माली होगा।

“मरियम!” यीशु ने जैसे ही फिर उसका नाम लिया तो वो तुरंत पहचान गई कि यह तो यीशु की ही आवाज़ थी। “रो मत और अब जाओ। सबको बता दो।” वो बहुत खुश हो गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि रोये या हँसे। वो बहुत ख़ुशी के साथ दौड़ी ताकि सबको बता दे।

कई चेले उसकी बात पर विश्वास नहीं कर सके पर उसी रात यीशु अपने चेलों से उसी कमरे में मिलने चले आये जहाँ वो सब बैठे थे। यीशु उनसे कुछ कहने लगे तो वो सब बहुत डर गये। उनको लगा कि कोई भूत है पर यीशु ने कहा, “डरो मत, तुम्हें शांति मिले। देखो, मैं हूँ। मुझे छू लो और जान लो कि सच में मैं ही हूँ।” उसने उनके साथ फिर खाना भी खाया और चेलों को फिर डर नहीं लगा। उनका डर मिट गया क्योंकि उन्होंने जान लिया कि प्रभु यीशु मरने के बाद भी सच में जीवित हो गये हैं जैसा कि उन्होंने पहले से बता दिया था।

यह सच में एक बहुत ही ख़ुशी का दिन था।