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Bible Story – The crucifixion of Jesus

Jesus was crucified by Roman soldiers on behalf of the Jews who rejected the Christ. Satan thought that he was won but it was his greatest defeat. Jesus paid the price of the sins of the mankind and set them free by dying on the cross. While it was the saddest story until he rose again on the third day but today we celebrate it as GOOD FRIDAY – because Jesus saves all those who believe in him.

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प्रभु यीशु का क्रूसीकरण

यीशु मसीह को गतसमनी के बाग से पकड़ कर लाने के बाद वो यीशु से सवाल करने लगे कि वह क्यों अपने आपको परमेश्वर के तुल्य बताता था।

सवाल, सवाल और ढेर सारे सवाल। पूरी रात वो सब विरोधी यीशु से अनेकों सवाल पूछते रहे। वो सब उससे बहुत नाराज थे। फिर सुबह तड़के ही, वो उसे रोमी सरदार के पास ले गये।

“इसका दोष क्या है? मुझे तो यीशु में कोई दोष नज़र नहीं आता।” उस रोमी गवर्नर ने बोला। वो यीशु को छोड़ देना चाहता था लेकिन भीड़ उसे उसको छोड़ने नहीं देना चाहती थी। “भले ही उस डाकू बरअब्बा को छोड़ दो लेकिन इस यीशु को क्रूस पर चढ़ाओ”, वो भीड़ बड़े गुस्से में चिल्ला रही थी। वो सब यीशु को मार डालना चाहते थे। लेकिन क्यों – यीशु तो भले थे, उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया था। पर वो सब यीशु को सिर्फ इसलिये मार डालना चाहते थे क्योंकि वो यीशु से नफरत करते थे।

“ये शक्स परमेश्वर के बारे में झूठ बोलता है,” उन्होंने कहा। वो यीशु के परमेश्वर के पुत्र या वाचा किया हुआ राजा और मसीह होने में विश्वास नहीं करते थे। गवर्नर भी उस भीड़ से डरता था। भीड़ के दबाव में अन्ततः उसने कहा, “ठीक है, तुम लोग जैसा बोलते हो मैं वैसा ही करूँगा, लेकिन बाद में मुझ पर दोष मत लगाना।” और फिर उसने यीशु को उन सैनिकों के हवाले कर दिया।

वो उसे उस खोपड़ी वाली पहाड़ी पर ले गये और उसको क्रूस पर चढ़ा दिया। उसके आजू-बाजू दो और कैदी भी क्रूस पर चढ़ाये गये थे। यीशु के सर पर एक पाटी लगी थी जिस पर लिखा था – “यीशु नासरी, यहूदियों का राजा।” प्रभु यीशु की माता मरियम और उनका चेला यूहन्ना भी वहीं पास में खड़े थे। “मेरी माँ का ख्याल रखना, यूहन्ना,” यीशु ने क्रूस पर से कहा। और यूहन्ना तुरंत ही मरियम को अपने घर ले गया।

इतना सब होने पर भी यीशु न तो उन सैनिकों से नफरत कर रहे थे जिन्होंने उनको क्रूस पर टांग दिया था और न ही उन विरोधियों से, जिनकी ज़िद के कारण यीशु क्रूस पर थे।

“पिता, इन्हें क्षमा कर,” यीशु ने प्रार्थना की और फिर बड़ी ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहा, “मेरा काम पूरा हुआ” और फिर अपने प्राण त्याग दिये। यह एक बड़ा दुःख का दिन था।

दो विश्वासियों ने यीशु का मृत शरीर उतारकर गुफा वाली कब्र में रखा जिसके मुहाने पर एक बड़ा भारी पत्थर रखा था। कुछ महिलायें ये देख रही थी परंतु देर हो रही थी और उनका घर जाना था। लेकिन उनको मालूम था कि उन्हें फिर वहाँ आना था।