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Bible Story – Jesus cleans the house of God

Jesus did not like the business in the house of God. It was meant to be a place of prayer and devotion but many used it for financial transactions. Jesus expressed his anger in the temple. It is the same today and Jesus still does not like it either.

We have a great learning from this story. Yeshanshi shared in her own charming way with a learning we cannot miss. Watch, subscribe and share…

Scroll down for the story text in hindi:

बाल कहानी – यीशु का गुस्सा

यीशु यरुशलेम जा रहे थे। अपने चेलों से उन्होंने कहा, “मुझे एक गधे की ज़रूरत है। तुम जाओ और तुम्हें एक गधा बंधा हुआ मिलेगा। उसे ले आओ और यदि कोई पूछे तो कहना – प्रभु को इससे काम है।” चेलों ने वैसा ही किया।

यीशु गधे पर बैठ गये। ऐसा काम इससे पहले किसी ने उस गधे के साथ नहीं किया था लेकिन फिर भी वो न तो उछला और न उसने दुलत्ती मारी। लोगों ने यीशु को राजा समझा और एक बड़ी भीड़ उनको देखने और उनसे मिलने को चली आई। वे सब लोग प्रभु यीशु के चमत्कारों को जानते थे। वो सब बहुत खुश थे क्योंकि उनका मसीहा आ गया था। वो सब नाच-गा कर खुश हो रहे थे।

“हुर्रे, हुर्रे! वाचा किया हुए हमारा मसीहा आ गया है, इस्रायल का राजा आ गया है। ईश्वर हमारे राजा को आशीष दे।” खजूर की डालियाँ और कपड़े उसके मार्ग में बिछाते हुए वे सब मंदिर तक पहुँच गये। गधे ने भी अपना काम बखूबी पूरा कर दिया था और अब वो अपने घर जा सकता था। मंदिर ईश्वर की आराधना का विशेष स्थान था जहाँ बहुत शांति थी और लोग अपनी प्रार्थना करने व भेंट चढ़ाने वहाँ आते थे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति उस जगह पर आया करती थी।

“कूहू – चींची” और “बाँ-बाँ” की आवाजें आ रही थीं – “कबूतर का जोड़ा ले लो, भेड़ ले लो, भेड़, मेमना ले लो। लाओ पैसा यहाँ जमा करो।” अनेक तरह की आवाज़ें आ रही थीं। परमेश्वर का मंदिर एक बाज़ार के जैसा लग रहा था। सब जगह स्टाल, दुकानें आदि सजी हुईं थी और लोगों की चिल्लाहट की आवाजें आ रहीं थी।

यीशु को बहुत गुस्सा आया।

“मेरे पिता का घर प्रार्थना का स्थान होना चाहिये। तुम सबने इसे व्यापार की जगह बना दिया है। तुम सब चोर-डाकू हो।’ प्रभु यीशु क्रोध में चिल्लाकर बोले और तुरंत उन्होंने सब दुकानों को उलट-पलट कर दिया, कबूतरों को उड़ा दिया और भेड़ों व मेमनों को खोल कर भगा दिया। इस सब में पैसे भी जहाँ-तहाँ बिखर गये। बाँ-बाँ करके भेड़-बकरियाँ भाग गईं।

मंदिर को पुरोहित और पुजारी यीशु से बहुत नाराज हो गये। लेकिन अंधे, लूले-लंगड़े और बीमार यीशु के पास आने लगे। प्रभु यीशु उनको ठीक करते जाते थे। मंदिर के कर्मचारियों को यह भी अच्छा नहीं लग रहा था परंतु वो भीड़ के कारण कुछ कर भी नहीं सकते थे। वे सब यीशु से जलने लगे।

“हमको कुछ करना होगा और इस यीशु से छुटकारा पाना होगा”, वो मिलकर इस विषय में बात करने लगे परंतु उनको समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कैसे करें। उसके बाद प्रभु यीशु का एक चेला (जिसने उनको बाद में धोखा भी दिया) उनसे मिलने आया। प्रभु यीशु ने यहूदा को अपना चेला होने के लिये चुना था पर अब वो उनका दोस्त नहीं रहा – उसके मन में कपट आ गया था। वो मंदिर के पुरोहितों के साथ खुसर-पुसर करने लगा और उन सबने मिलकर एक धूर्त योजना बनाई।

शिक्षा – परमेश्वर पाप से घृणा करते हैं । पाप करके हमें परमेश्वर को, अर्थात प्रभु यीशु को नाराज़ नहीं करना चाहिये।