Baatein jeevan ke moti
बाटें जीवन के मोती

We all are called to know God personally. Whilst we have tasted his goodness and have put our faith in him after knowing him personally, we are also called to live in obedience to his commandments in love. Lord Jesus Christ gave a commission of immense importance to his disciples in the gospel according to Matthew, chapter 28 and verses 19-20 that we must go out and tell all people regardless of their caste, creed, sex, age and religion about the love of God and freely given forgiveness for all repentant sinners. By my first hand experience I have learnt many aspects of gospel sharing and evangelism which I wish to share with you in this book to understand those aspects where many believers and leaders fail equally and make people either rigid towards salvation or are even persecuted for offending the religious sentiments of their subjects.
बाटें जीवन के मोती
Present book tries to touch various aspects in simplicity and explain what is God’s love, how to share, what to avoid and what to consider. Lord Jesus did not come only to heal the sick and solve our problems (which he does in the answer of our prayers because of his great love for us), the gospel is beyond that – its about the love of a holy God towards sinners and is great sacrifice to pay the price of the sinful race and restore/reconcile them to God.

Book also touches about contextualization of the ways by which we try to reach out and what should be avoided as part of contextualization.

हम सभी की बुलाहट है कि हम परमेश्वर को जाने। उसे चखने और जान लेने के बाद उसपर विश्वास कर आज्ञाकारिता का जीवन बितायें। प्रभु यीशु की एक बहुत महत्वपूर्ण आज्ञा है (मत्ती 28:18-20) कि हम परमेश्वर के प्रेम, क्षमा, तथा  मोक्ष का सुसमाचार सभी लोगों तक पहुँचायें और उन्हें चेला बनायें। अपने अनुभव तथा परमेश्वर की प्रेरणा से मैंने उन विषयों को छूने की कोशिश की है जिसके कारण कई बार प्रचारक उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाकर उनसे अनजाने में दुश्मनी मोल ले बैठते हैं।

प्रस्तुत पुस्तक इस विषय वस्तु को छूने की कोशिश करती है कि परमेश्वर का सच्चा प्रेम क्या है, और उसे पा लेने के बाद कैसे एक व्यक्ति दूसरों से इस विषय पर बात करने और उन्हें भी ईश्वर से संबंध बनाने के लिये प्रेरित करता है। ईश्वर के प्रेम का सच्चा सुसमाचार क्या सिर्फ इतना ही है कि वह हमारी बीमारियों को ठीक कर सकता है, परेशानियों को मिटा सकता है और हमें जीवन जीने की सभी सुख-सुविधायें दे सकता है या फिर सच्ची खुशखबरी कुछ और ही है। कौन सी बातें हैं जो हमें सीखनी आवश्यक हैं और किस स्वभाव से हम परमेश्वर का प्रेम दूसरों के साथ बांट सकते हैं।

यह पुस्तक भारतीयकरण के कुछ विचार प्रस्तुत करती है जिसमें सुसमाचार के भारतीयकरण को हिन्दूकरण से पृथक किया गया है। हमारी भाषाशैली, तौरतरीकों और वस्त्रादी में किस प्रकार का बदलाव हमारे काम में हमारी सहायता कर सकता है, यह आप इस पुस्तक में पढ़ सकते हैं।

Read Online | Download Write to the Author

Listen a leadership message about Servanthood here:
परमेश्वर के सेवक के गुणों के बारे में लीडरशिप संदेश सुनिये | क्लिक करें

 

Aatmik Sandesh Masihi Satsang