Sabka Malik Ek hei |
सबका मालिक एक
है | Brijesh Chorotia
अगर ऐसा है तो फिर
समाज में इतना बैरभाव क्यों? क्या हम सच में मानते हैं कि सबका
मालिक एक है या बस कहने के लिये कह देते हैं? दुनिया में बहुत से
धर्म हैं। उन सबके रीतिरिवाज अलग अलग हैं और वे सभी इस बात को तूल
देते हैं कि उनका ही रास्ता ठीक है। तो क्या बाकी रास्ते गलत हैं?
क्या आप भी ऐसा ही सोचते हैं? "हमारे यहाँ तो ऐसा होता है" या "हम
तो यह मानते हैं", यह बात हर जगह धार्मिक विषय पर हो रही बातचीत
में सुनाई देती रहती है। क्या ईश्वर भी ऐसे ही बँटा हुआ है?
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Apka Moolya Chukaya gaya hei|
आपका मूल्य चुकाया गया है
|
Narsimha Rao
पुरातन ग्रंथ और आध्यात्मिक
धर्मशास्त्र कहते हैं कि पूरी मानव जाति पाप के अंधकार में फंस कर
अपने सृष्टिकर्ता के सान्निध्य से दूर हो गई है। हर प्रकार के पाप
की क्षमा के लिये शुद्ध तथा निष्कलंक रक्त का बहना ज़रूरी है,
क्योंकि लहू में जीवन होता है। कोई पशु पक्षी आदि का लहू नहीं
परंतु परम पवित्र परमात्मा (सृष्टिकर्ता परमेश्वर) के लहू बहाने से
ही सर्व मानवजाति का पाप क्षमा हो सकता है।
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